TIO कामचटका

यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक, भूकंप 152 किमी की गहराई में आया। - Dainik Bhaskar

यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक, भूकंप 152 किमी की गहराई में आया।

रूस के कामचटका प्रायद्वीप में शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे 7 तीव्रता का भूकंप आया। इसमें किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है।

इसके कुछ देर बाद जापान की मौसम एजेंसी ने गलती से 9.9 तीव्रता के भूकंप की चेतावनी जारी कर दी। इससे देशभर में अफरातफरी मच गई।

हालांकि, एजेंसी ने करीब 12 मिनट बाद अलर्ट वापस ले लिया। जापान की मौसम एजेंसी ने इस गलती के लिए माफी मांगी है।

भूकंप के अलर्ट के बाद लोग सड़कों पर आकर बैठ गए।
भूकंप के अलर्ट के बाद लोग सड़कों पर आकर बैठ गए।

जापान की भूकंप चेतावनी प्रणाली जमीन पर लगे सेंसर से मिले शुरुआती आंकड़ों के आधार पर भूकंप की तीव्रता और उसके असर का अनुमान लगाती है। यह काम कुछ ही समय में किया जाता है।

शुरुआत में आंकड़े अधूरे होने के कारण अनुमान गलत हो सकता है। लेकिन इस बार 9.9 तीव्रता का अलर्ट जारी करना बड़ी चूक थी। इतनी तीव्रता का भूकंप अब तक दर्ज नहीं किया गया है।

जापान की मौसम एजेंसी (JMA) ने बताया कि भूकंप की तीव्रता का जरूरत से ज्यादा अनुमान लगाने के कारण गलत चेतावनी जारी हुई थी। एजेंसी अब इसकी वजह की जांच कर रही है।

शुरुआती आंकड़े अधूरे होने, भूकंप का निगरानी केंद्रों से दूर आने या आसपास एक साथ कई भूकंप आने से अनुमान प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इस मामले में सेंसर या सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी जैसी किसी वजह की पुष्टि नहीं हुई है।

2025 में कामचटका में 10 साल का सबसे तेज भूकंप आया था

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कामचटका में 1200 से ज्यादा भूकंप दर्ज किए गए थे।

इनमें से अधिकांश छोटे-मोटे (मैग्निट्यूड 2.0 से 4.0 के बीच) थे, लेकिन 4.0 या इससे ऊपर के 150 से ज्यादा भूकंप हुए। इस क्षेत्र में पिछले साल 3 बड़े भूकंप 7.0 या उससे अधिक तीव्रता के दर्ज किए गए थे।

साल 2025 का सबसे विनाशकारी भूकंप जुलाई को रूस के कामचटका में पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8.8 मापी गई। यह पिछले 10 वर्षों का सबसे बड़ा झटका था। इसने कई देशों को प्रभावित किया।

कामचटका में 30 जुलाई 2025 को 8.8 तीव्रता का भूकंप आने के बाद सुनामी आई थी।
कामचटका में 30 जुलाई 2025 को 8.8 तीव्रता का भूकंप आने के बाद सुनामी आई थी।
पिछले साल आए भूकंप से कामचटका के उत्तरी कुरीलों में एक घर की छत का हिस्सा गिरता नजर आया था।
पिछले साल आए भूकंप से कामचटका के उत्तरी कुरीलों में एक घर की छत का हिस्सा गिरता नजर आया था।

कामचटका में बार-बार भूकंप क्यों आते है?

कामचटका प्रशांत महासागर के उस इलाके में है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला ऐसा क्षेत्र है, जहां दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी फटते हैं।

कामचटका में बार-बार भूकंप आने की मुख्य वजह जमीन के नीचे मौजूद विशाल प्लेटों की हलचल है। यहां प्रशांत प्लेट धीरे-धीरे ओखोत्स्क प्लेट के नीचे खिसक रही है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहते हैं।

दोनों प्लेटों के बीच घर्षण से चट्टानों में दबाव जमा होता रहता है। जब यह दबाव अचानक बाहर निकलता है, तो भूकंप आता है।

प्लेटों की इसी हलचल से जमीन के नीचे गर्म पिघला हुआ पदार्थ बनता है, जिसे मैग्मा कहते हैं। यह बाहर निकलता है तो ज्वालामुखी फटता है। यहां कई सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं। समुद्र के नीचे तेज भूकंप आने पर सुनामी का खतरा भी रहता है।

इस इलाके में जमीन के नीचे प्लेटों की हलचल लगातार जारी रहती है। इसलिए यहां भविष्य में भी भूकंप आने की आशंका बनी रहेगी।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER