बेख़ौफ़, बेधडक़ बात
शशी कुमार केसवानी के साथ
आम भारतीय दाल रोटी को तरस रहा है लेकिन कुछ उद्योगपति राजनीतिक संरक्षण पाकर किस तरह से हेराफेरी कर रहे है इसका अनुमान लगाना आम जनता के बस की बात नहीं है। हाल ही में राजेश मेहता के जो कांड सामने आ रहे है उसमें बहुत सी चीज अंदर छुपी हुई है इसके अंदर एलआईसी, एसबीआई भी शामिल है लेकिन राजनीतिक पकड़ के चलते चीजें ढंकी हुई है। आने वाले समय में ऐसे कई और फ्राड सामने आएंगे अकेला राजेश मेहता ही नहीं ऐसे कई राजेश मेहता देशभर में भरे पड़े हैं जिनपर नजर जाना अभी बाकी है।
एक आम आदमी और आम निवेशक की नजरिये से राजेश एक्सपोर्ट (Rajesh Exports) की गड़बड़ी हैरान करती है. यह बात हजम नहीं हो रही है कि 3,000 करोड़ रुपये की मार्केट कैप वाली कंपनी 15 लाख करोड़ रुपये का हेरफेर कैसे कर सकती है? 15 लाख करोड़ रुपये इतनी बड़ी रकम है, जो कि भारत के कुल सालाना एक्सपोर्ट के करीब 20 फीसदी के बराबर है.
दरअसल, बाजार नियामक SEBI (सेबी) ने जून 2026 में कंपनी और उसके CMD राजेश मेहता पर जो अंतरिम आदेश जारी किया है, उसे बारीकी से देखने पर समझ आता है कि यह खेल असल में क्या है. ये कोई बैंक से पैसा लेकर भागने वाली गड़बड़ी नहीं है, बल्कि अकाउंटिंग फ्रॉड (कारोबार में हेराफेरी) का मामला है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि राजेश मेहता कैसे वर्षों तक इस खेल को अंजाम देते रहे.
‘मार्केट वैल्यू’ बनाम ‘सालाना टर्नओवर’
दरअसल, गुरुवार को Rajesh Exports लिमिटेड का मार्केट 3,090 करोड़ रुपये है, शेयर में 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा है. करीब 3,000 करोड़ रुपये की कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स मुख्य रूप से सोने की रिफाइनिंग और ज्वेलरी का बिजनेस करती है. सोने के बिजनेस में मार्जिन बहुत कम 0.5% से 1% का होता है. लेकिन इसका टर्नओवर बहुत भारी-भरकम होता है.
राजेश एक्सपोर्ट्स कंपनी ने दस्तावेजों में हर साल 2.5 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये का बिजनेस यानी सेल दिखा रही थी. लेकिन सेबी ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 यानी 5 साल के दौरान अपनी वित्तीय रिपोर्टों में भारी गड़बड़ी की है. समझने वाली बात ये है कि यह 15 लाख करोड़ रुपये कोई एक झटके में गायब की गई नकदी नहीं है.
यह पिछले 5 साल में दिखाए गए कुल अर्जित राजस्व का करीब 99.8% हिस्सा है, जिसे सेबी ने अपनी जांच के बाद फर्जी और भ्रामक बताया है, जांच में पाया गया है कि ये आंकड़े केवल कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है. आसान शब्दों में पिछले 5 साल में कंपनी ने जो कुल 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री दिखाई थी, वह सिर्फ कागजों पर थी, असल में हुई ही नहीं.
यह खेल खेला कैसे गया?
सेबी और फोरेंसिक ऑडिटर (BDO India) की जांच के मुताबिक राजेश एक्सपोर्ट्स ने इस भ्रामक आंकड़े को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाए.
1. विदेशी शेल और सब्सिडियरी कंपनियों का जाल
राजेश एक्सपोर्ट्स की कई विदेशी सहयोगी कंपनियां हैं, जैसे कि सिंगापुर में REL Singapore और स्विट्जरलैंड में Valcambi रिफाइनरी है. कंपनी ने दिखाया कि सारा बिजनेस और रेवेन्यू इन विदेशी कंपनियों के जरिए आ रहा है. जब जांच के दौरान सेबी ने इन विदेशी कंपनियों के अकाउंटिंग सिस्टम, बिल और बैंक ट्रांजैक्शन की डिटेल्स मांगी, तो कंपनी ने डेटा देने से साफ मना कर दिया. जिससे शक सही साबित हुआ.
2. सर्कुलर ट्रेडिंग (कागजी ट्रेडिंग)
सोने के कारोबार में ‘सर्कुलर ट्रेडिंग’ करना बहुत आसान होता है, एक ही सोने की खेप या बिल को अपनी ही 4-5 डमी कंपनियों के बीच गोल-गोल घुमा दिया जाता है. सेबी को शक है कि राजेश एक्सपोर्ट्स में भी 97% से 99% रेवेन्यू इसी तरह हवा में बनाया गया था.
3. अफ्रीकी माइंस में निवेश भी शक के दायरे में
कंपनी ने 2023 में दावा किया था कि उन्होंने अफ्रीका में सोने की खदानों में 1,035 करोड़ रुपये का निवेश किया है. लेकिन जब ऑडिट हुआ, तो न तो राजेश एक्सपोर्ट्स के अकाउंट में और न ही इसकी किसी सब्सिडियरी के खातों में इस निवेश का कोई वजूद मिला.
क्यों किया कंपनी ने फर्जीवाड़ा?
राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी बैलेंस शीट को इतना बड़ा और आकर्षक इसलिए दिखाया ताकि शेयर बाजार में निवेशकों, बैंकों (जैसे केनरा बैंक) और LIC जैसी बड़ी संस्थाओं को यह भरोसा दिलाया जा सके कि कंपनी का ऑपरेशनल स्केल बहुत बड़ा है.
लेकिन अब सेबी ने शिकंजा कस दिया है, कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने की रोक लगा दी गई है. नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) को कंपनी के ऑडिटर (BSD & Co) के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है, जिन्होंने इतने सालों तक इस 15 लाख करोड़ के भ्रामक आंकड़ों पर आंखें मूंदकर साइन किए.
कंपनी की सफाई, आरोप बेबुनियाद
वहीं सेबी के आरोपों पर राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने अपने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं. कंपनी का कहना है कि सेबी का यह आदेश केवल अंतरिम (शुरुआती) है और सेबी ने अभी तक किसी भी मामले पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है. कंपनी ने दावा किया है कि उसके द्वारा घोषित किए गए रेवेन्यू के आंकड़े बिल्कुल सही हैं और टर्नओवर को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया है.







