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देश में बेरोजगारी घट रही है और श्रम भागीदारी बढ़ी है। यानी अर्थव्यवस्था ‘क्राइसिस मोड’ में नहीं है। महिलाओं की आय तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी पुरुषों से उनका वेतन करीब 5,900 रुपए या 31% तक कम है।

इसका मतलब है कि समान अवसर अभी भी पूरी तरह नहीं मिले हैं। महिलाएं या तो कम वेतन वाले सेक्टर में हैं या समान काम के लिए कम पेमेंट पा रही हैं। यह जानकारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2025 (पीएलएफएस) में दी गई है।

सर्वे बताता है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच नियमित वेतनभोगी बढ़े हैं। ऐसे वेतनभोगी पुरुषों का औसत वेतन 5.80% तो महिलाओं का 7.16% बढ़ा। पिछले एक साल में महिलाओं की औसत दैनिक मजदूरी 16 रु. बढ़कर 315 रु. हो गई, जबकि इस दौरान पुरुषों की मजदूरी 1 रु. घटकर 455 रु. रह गई है।

स्वरोजगार में लगे पुरुष महिलाओं से 3 गुना ज्यादा मा​सिक कमाई कर रहे हैं। एक महिला जहां अपने काम के लिए 6,374 रु. महीना कमा रही है, वहीं पुरुष 17,914 रु. तक कमा ले रहे हैं। सर्वे के मुताबिक देश की श्रमशक्ति में एक साल में मामूली 0.3% की बढ़ोतरी हुई है।

इस दौरान बेरोजगारी की दर 3.3% से घटकर 3.1% रह गई। शिक्षित लोगों के मध्य बेरोजगारी 0.5% घटकर 6.5% पर आ चुकी है। युवा बेरोजगारी दर भी अब ​सिंगल डिजिट में आ गई।

स्किल गैप: 4.2% के पास ही तकनीकी ज्ञान

सर्वे बताता है कि देश में अभी 67.8% आबादी कम से कम माध्यमिक स्तर तक शिक्षित है। इसके बावजूद केवल 4.2% लोगों को ही औपचारिक तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण मिला है। यह बड़े स्किल गैप को दर्शाता है। चिंता की बात यह है कि 15–29 आयु वर्ग के 25% युवा न रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही प्रशिक्षण में शामिल हैं। देश में 61.6 करोड़ कार्यरत आबादी होने के बावजूद यह स्थिति बताती है कि शिक्षा और रोजगार के बीच संतुलन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER