TIO छतरपुर
मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का चिता आंदोलन फिर शुरू हो गया है। बरसात में घर तोड़े जाने और मुआवजा न मिलने से नाराज ग्रामीण न्याय दो या मार दो के नारे के साथ चिताओं पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापित हुए ग्रामीणों का चिता आंदोलन एक बार फिर भडक़ उठा है। अप्रैल महीने में प्रशासन के आश्वासनों के बाद स्थगित किया गया यह आंदोलन अब न्याय दो या मार दो के नारे के साथ पन्ना जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे फिर से शुरू हो गया है। आंदोलन के तीसरे दिन ग्रामीणों ने प्रशासन पर भारी भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियां अपनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलन के नेता अमित भटनागर ने बताया कि प्रशासन ने संवेदनशीलता की सभी हदें पार कर दी हैं। बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के मानसून की बरसात के बीच ही प्रभावित लोगों के घर ढहा दिए गए, जिससे हजारों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। भटनागर का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए धरना स्थल की बिजली काट दी गई है और पीने के साफ पानी की आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। आवाज उठाने पर ग्रामीणों पर फर्जी केस दर्ज करने और पुलिस का डर दिखाकर पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने के आरोप भी लगे हैं।
चिता पर लेटीं महिलाएं, गोद में नवजात बच्चे : केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत छतरपुर-पन्ना सीमा पर ढोडन बांध का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इससे प्रभावित गांवों के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं ने अब सीधे चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं आदिवासी महिलाएं दिव्या अहिरवार, लक्ष्मी आदिवासी और बड़ी बहू आदिवासी चिलचिलाती धूप और खुले आसमान के नीचे नवजात बच्चों को गोद में लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि यदि सरकार उन्हें उचित न्याय और मुआवजा नहीं दे सकती, तो उन सभी को सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।






