TIO नई दिल्ली

NEET UG 2026 Paper Leak Case: नीट (NEET UG Paper Leak) पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की है. देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा पैदा की थी. सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत को बताया कि चार्जशीट के साथ जुड़े एनेक्सचर दस्तावेजों को स्कैन करने की प्रक्रिया जारी है. अदालत ने चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लेते हुए एजेंसी को शेष दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई अब 3 अगस्त को होगी, जहां जांच की प्रगति पर आगे चर्चा की जाएगी.

20 हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल NEET Paper Leak CBI Chargesheet

मंगलवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दाखिल चार्जशीट करीब 20 हजार पृष्ठों की है. अदालत ने चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लेते हुए नोट किया कि इसमें दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और जब्त वस्तुओं की विस्तृत सूची शामिल की गई है. कोर्ट ने CBI से पूछा कि जिन बयानों और दस्तावेजों का चार्जशीट में उल्लेख किया गया है, वे कहां हैं? इस पर CBI ने बताया कि लगभग 20 हजार पन्नों के एनेक्सचर दस्तावेजों को स्कैन किया जा रहा है और उन्हें जल्द दाखिल किया जाएगा.

13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया आरोप पत्र

CBI ने 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है. इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के आरोप लगाए गए हैं. इसके अलावा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत भी कार्रवाई की गई है. चार्जशीट में नामजद सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

 

360 गवाह और 422 दस्तावेज बने जांच का आधार

CBI ने अपनी जांच में 360 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं. आरोप पत्र में 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों (Material Objects) को शामिल किया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेख विशेषज्ञों की राय और शैक्षणिक विशेषज्ञों के विश्लेषण से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से लीक किए गए थे और आरोपियों की इसमें भूमिका रही.

92 ठिकानों पर छापेमारी

उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत मिलने के बाद CBI ने 12 मई 2026 को FIR दर्ज की थी. इसके तुरंत बाद 72 अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष टीमें गठित की गईं, जिनमें 8 साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल थे. जांच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों में कुल 92 स्थानों पर छापेमारी की गई. इन छापों में डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई. इसके बाद फोरेंसिक इमेजिंग और डिजिटल विश्लेषण के जरिए पूरे नेटवर्क की जांच की गई.

NTA के तीन विशेषज्ञ भी आरोपी

CBI के अनुसार मामले में NTA से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञ भी गिरफ्तार किए गए हैं. इनमें केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ बिचौलियों ने कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र प्राप्त कर अभ्यर्थियों और अन्य लोगों तक पहुंचाया. कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो व्यक्तियों को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है.

बैंक खाते और लॉकर फ्रीज

जांच के दौरान CBI ने कथित मनी ट्रेल का भी विश्लेषण किया. एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े कई बैंक खातों, बैंक लॉकरों और एक डीमैट खाते को फ्रीज कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक लेनदेन की जांच से पेपर लीक में शामिल लोगों और लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिली है.

3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त तय की है. इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता वीके पाठक और अर्जुन आनंद को लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है. CBI का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे और साक्ष्य सामने आ सकते हैं. एजेंसी का दावा है कि उसने प्रश्नपत्र लीक करने वालों से लेकर उसका लाभ उठाने वाले नेटवर्क तक की पूरी श्रृंखला की पहचान कर ली है.

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER