रंजन श्रीवास्तव

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराहट के कारण संसद ठप पड़ी हुई है. विपक्ष केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर है. उसका सवाल खास तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ कथित तौर पर पेलेट गन और कील लगी लाठियों के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी.
विपक्ष की नाराजगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में पिछले 18 दिनों से अनुपस्थिति को लेकर भी है. राहुल गांधी समेत विपक्ष का कहना है कि उन्हें शिक्षा व्यवस्था पर कोई भाषण नहीं चाहिए. उन्हें सरकार से सीधा और साफ जवाब चाहिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस तरह के बल प्रयोग का आदेश किसने दिया.
लेकिन इसी राजनीतिक गतिरोध के बीच झारखंड में युवा आंदोलन कर रहे हैं. उनका सवाल भी जवाबदेही का ही है. यहां भी सवाल प्रदर्शन के दौरान सिर्फ पुलिस कार्रवाई पर नहीं, बल्कि उन परीक्षाओं का भी है जिनमें लगातार गड़बड़ियां हुईं है और जिसके कारण युवाओं के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है.
10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के बाद मामला और गरमा गया. भाजपा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया है.
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पथराव में 14 पुलिसकर्मी घायल हुए. दूसरी तरफ छात्र और विपक्षी दल पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग का आरोप लगा रहे हैं.
सरकार ने छात्रों की सबसे बड़ी मांगों में से एक जरूर मान ली है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा रद्द करने की घोषणा की है. इसके अलावा दो अन्य झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही गई है. सरकार ने टीडीपीएल (TDPL) द्वारा कराई गई परीक्षाओं की भी जांच कराने की घोषणा की है.
इन परीक्षाओं को झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित किया जाता है जिसके माध्यम से राज्य सरकार के सबसे प्रतिष्ठित पदों के लिए चयन किया जाता है. यह बताता है कि गड़बड़ियां कितनी गंभीर हैं.
गड़बड़ियों का आरोप कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है. सीआईडी का आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा कराने का काम देने में अनियमितताएं हुईं और इसके पीछे रिश्वत का लेन-देन हुआ. खियांग्ते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा यह कहते हुए दिया था कि इससे सीआईडी जांच बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकेगी. हालांकि बाद में सीआईडी ने उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया.
सीआईडी ने कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी के अनुसार वह खियांग्ते और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के आरोपी अभय तिवारी के बीच कड़ी का काम करता था.
अभय तिवारी पर आरोप है कि वह एक संगठित गिरोह चला रहा था, जो झारखंड लोक सेवा आयोग के अलावा झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की परीक्षाओं में भी कथित तौर पर गड़बड़ी कराता था. इस मामले में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है. इनमें लोक सेवा आयोग की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और टीडीपीएल (TDPL) के निदेशक रामवीर सिंह भी शामिल हैं.
अब जरा कर्नाटक की तरफ देखिए.
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और वहां भी कर्नाटक लोक सेवा आयोग की ओर से 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा सवालों के घेरे में है. अभ्यर्थियों ने कथित कैश फार जाब स्कैम के आरोप लगाए हैं.
और यहां भी आयोग के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति पर ही सवाल उठे हैं. कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकर को निलंबित किया. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए अपनी दो बेटियों के चयन से जुड़े मामले में हितों के टकराव को घोषित नहीं किया. उनकी एक बेटी के खिलाफ कथित फर्जी आय प्रमाणपत्र के इस्तेमाल को लेकर एफआईआर भी दर्ज हुई है.
तो सवाल सीधा है.
जब दिल्ली में नीट पेपर लीक तथा प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार से जवाबदेही मांग रहा है, तब वही विपक्ष झारखंड और कर्नाटक में सरकारों से जवाबदेही की मांग उसी ताकत से क्यों नहीं कर रहा?
नीट (NEET) पेपर लीक के समय जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन और संसद में विपक्ष का विरोध भी इसी जवाबदेही की मांग को लेकर था. तब विपक्ष का तर्क था कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
अगर केंद्र में भाजपा सरकार से से नीट पेपर लीक तथा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस तथा रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा बल प्रयोग पर सवाल पूछा जा सकता है, तो झारखंड सरकार से यह भी पूछा जाना चाहिए कि झारखंड लोक सेवा आयोग जैसी संस्था में इतनी बड़ी गड़बड़ियां कैसे हुईं. पुलिस का हिंसात्मक बल प्रयोग क्यों हुआ. कर्नाटक सरकार से भी पूछा जाना चाहिए कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग में नौकरी के बदले पैसे मांगने जैसे स्कैम के लिए कौन कौन जिम्मेदार है.
इन दोनों राज्यों में इन गड़बड़ियों के लिए सरकार में किसकी जवाबदेही है? और जिनकी जवाबदेही है उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER