शशी कुमार केसवानी

– क्या बारिश को मुश्किल मानकर सारे इल्जाम बारिश पर रखना ठीक है?
– सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर सवाल उठाना क्या गलत है?
– अगर बारिश दोषी है तो तैयारी बारिश के हिसाब से ही होनी चाहिए।

मुंबई में दो महीने पहले 7000 करोड़ की लागत से बना मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक एक ही बारिश में बैठ गया। क्या हर इल्जाम बारिश पर ही लगाया जा सकता है। अगर बारिश नहीं होती तो क्या पुल का भूस्खलन नहीं होता। क्या सारी पोल बारिश में ही खुलती है। दो महीने पहले जब इसका उद्घाटन हुआ था तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस ने इसे इंजिनियरिंग का अजूबा बताया था। क्या अब वे इस बारे में बात करेंगे कि यह अजूबा धराशाई क्यों हो गया है? गड्ढे और पानी का जमाव कैसे हो रहा है? क्या सारा दोष बारिश पर ही थोप दिया जाने वाला है? या जिन्होंने इस मिसिंग लिंक को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे उनसे कुछ पूछा भी जाएगा? मुंबई की बारिश में सिफऱ् मिसिंग लिंक ने ही नहीं निराश किया है। मिडल क्लास की सडक़ों और मोहल्लों से बाहर निकलकर मीडिया कवरेज करेगा तो पता चलेगा कि असल में मुंबई की हालत क्या कर दी गई है। धारावी की गलियों में पानी के जमाव में केमिकल का रिसाव भी शामिल है। लोग झेले जा रहे हैं। इंफ्रा और विकास के नाम पर किए गए अनाप-शनाप निर्माणों ने मुंबई के निवासियों के जीवन में कौनसी राहतों की बौछार कर दी? एक हफ़्ते की बारिश में मुंबई का यह हाल है। मानसून ने अभी सिफऱ् दस्तक ही दी है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में 7 देशों की मदद ली गई थी। पर दुर्भाग्य ये है जिस देश में हवा में कार्बन से ज्यादा भ्रष्टाचार फैला हुआ हो वहां ये हालत होना तो स्वाभाविक है। पर आश्चर्य की बात ये है मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस किस तरह से पुल की इंजीनियरिंग की गुणगान कर रहे है। बता रहे है विपरीत परिस्थियितों में इसका कार्य किया गया है। गिनीज ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड बुक ने भी इसे अवार्ड दिया है। मुझे लगता है गिनीज बुक वाले भी अंधों की तरह रेवडिय़ां बांटते है। आंधियों के लिए पुल तैयार था पर बारिश के लिए पुल तैयार नहीं था। आजकल सरकार पुल नहीं बनाती पुल से ज्यादा बातें बनाती है। सवाल है 7 हजार करोड़ की लागत से और 7 देशो की मदद से बना पुल एक बारिश के लिए तैयार नहीं हो सका। ३-3 इंजीनियरिंग मार्बल किस काम के। मीडिया को बताया जा रहा है कि टनल तो सुरक्षित है बाहरी ढांचा बाहर है। महाराष्ट्र रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन के वाइस चेयरमेन अनिल कुमार का बयान छपा है उन्होंने इसे एक्ट ऑफ गॉड कहा है। कोलकाता में 2016 में एक पुल गिरा था जिसे ममता बैनर्जी ने एक्ट ऑफ गॉड कहा था। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्ट ऑफ फ्राड कहा था। मुंबई में कहीं एक्ट ऑफ फ्रांड तो नहीं हुआ? अभी हाल ही में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस एक आयोजन में कह रहे थे कि लोग मुझे सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे है और गंदे शब्दों का उपयोग कर रहे है। मैंने तो इस तरह का काम किया है वो अपने आप में मिसाल है। ऐसा न हो मुझे मजबूर होकर सख्त कार्रवाई करनी पड़े। आश्चर्य की बात है एक मुख्यमंत्री होकर अपनी आचोलना का सही जवाब देने के बजाय धमकी भरे अंदोज में बोल रहे है। एक सभा में फड़णवीस ने कहा कि जिनको कुत्ता भी नहीं पूछता वे सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को भी गाली बकते है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री की कितने कुत्तों से बात हुई जो बताया उन्होंने कि हम उसे पूछते तक नहीं है। बेहद अफसोसजनक भाषा है। एक मुख्यमंत्री होकर इस तरह का बयान देना। शिवसेना सरकार के समय से उनकी पत्नी ने सोशल मीडिया पर पानी का एक फोटो डाकर शेर लिखा था। इस बार उन्होने इस बारिश पर कुछ अपना विचार नहीं रखा। पिछले 8 दिनों में जिस तरह की बारिश हुई है महाराष्ट्र में उस तरह की बारिश जुलाई के पूरे माह में होती है। दुनिया भर में बारिश में दिक्कतें तो आती है पर सुरक्षा के इंतजाम हमेशा रहते है। पर भारत में सुरक्षा के इंतजाम उस तरह से नहीं है जिस तरसे होना चाहिये। देशभर में सडक़ों के अलावा फ्लाईओवर और टनल्स में जिस तरह से रोड उखड़ रहे है और जो त्राहि त्राहि हो रही है वा आश्चर्यजनक है। अभी तो बारिश शुरू हुई है। मुंबई की समस्या ये है हाइराइल बिल्डिंगो के आसपास पानी का जमाव हो जाता है। कारें तैरने लगती है। लोकल ट्रेल की पटरिया पानी से भर जाती है। तो मिडिल क्लास उसकी रील बनाकर लोगों को दिखाता है या फोटो वायरल करता है लेकिन अफसोस जागरुक नहीं होता।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER