बेख़ौफ़, बेधडक़ बात
शशी कुमार केसवानी के साथ
इस समय देश में पेट्रोल और एथेलॉन को लेकर जिस तरह की बहस छिड़ी हुई है सारा सोशल मीडिया इसी न्यूज से भरा पड़ा है। लोग शिकायत कर रहे हैं कि उनकी गाडिय़ा बंद हो रही है फ्यूल पंप खराब हो रहे है। तकनीकी तौर पर और कई खराबियां आ रही है। जिसका मंै स्वयं भी भुग्त भोगी हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि सरकार और गडकरी ये कौन सा खेल , खेल रहे है। जबकि इसका पहले कुछ गाडिय़ों पर प्रयोग होना चाहिए था। जिसका नतीजा एक साल में आता है। उसके बाद सरकार को निर्णय लेना चाहिए था। मेरी नजर में गडकरी एक आदर्श पिता तो हो सकते है। पर अब वे जिम्मेदार नेता नहीं रहे। उन्हें फैसला जनता के हित में लेना चाहिए था। सरकार तो ताकतवर है सभी कंपनियों को मारूती, होंडा, स्कोडा, महिन्द्रा, टाटा, टोयोटा इत्यादि कंपनी के सीईओ की प्रेस कान्फ्रेन्स करवा दे। उसमें वे आकर पब्लिक से बोल दे कि सर्विस स्टेशन में इस तरह की कोई गाड़ी नहीं आ रही है। उनकी गाड़ी एकदम ठीक चल रही है। मारूति शिफ्ट, आई 20, टाटा पंच, स्कोडा, ब्रेजा जैसी कई गाडिय़ा या होंडा एसवी 125 बाइक या एक्टिवा सब ठीक चल रही है इनमें कोई परेशानी नहीं आ रही। इतना भर बोलना है पूरे देश मेें समस्या एक पल में समाप्त हो जाएगी। लेकिन हमारे पास कई जानकारियां आ रही है। कि गाडिय़ों मं बहुत परेशानी आ रही है। गाडिय़ा पहले जैसी नहीं चल रही है। देश में ई-20 पेट्रोल बेचने का फैसला दो मंत्री तो नहीं कर सकते।
क्या देश में प्रधानमंत्री के बिना सहमति के फैसले होने लगे है? इन तर्कों से गाडिय़ों के माइलेज कम होने का जवाब न कंपनी दे रही है न सरकार। हालात यहां पहुंच गए है कि पड़ोसी देश ने भी ई २० पेट्रोल लेने से इंकार कर दिया है।
भारत में इस समय ई२० पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इन पोस्ट में कहा जा रहा है कि E२० ब्लेंड (जिसमें ८०त्न पेट्रोल और २०त्न इथेनॉल होता है) से गाडिय़ों को भारी नुकसान हो रहा है। इन सबके बीच E२० पेट्रोल को लेकर एक खबर भारत के पड़ोसी देश भूटान से भी आई है। खबर यह है कि भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के E२० पेट्रोल सप्लाई करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। यानी वहां कि सरकार भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से ई२० पेट्रोल नहीं खरीदना चाहती।
भूटान की वेबसाइट thebhutanese के अनुसार भूटान ने भारत से ई२० पेट्रोल लेने से मना करने के पीछे की वजह इंजन की कम्पैटिबिलिटी (अनुकूलता) से कहीं ज्यादा गंभीर चिंताएं बताई हैं। और भारत में पेट्रोलियम मंत्री हरदीपपुरी का एक बयान जिसका खूब मजाक उड़ाया जा रहा है कि रेसिंग कारों में भी इथेनॉल का इस्तेमाल होता है और यह एक्सेलरेशन बढ़ाता है और यह बायोफ्यूल उन्हें तेजी से रफ्तार पकडऩे में मदद करता है। इस समय देश में स्थिति अजब बनी हुई है।
मिडिल ईस्ट संकट की वजह से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच तेल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़े भारी आर्थिक बोझ का जिक्र करते हुए पुरी ने बायोफ्यूल की ज्यादा ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के सरकार के फैसले का बचाव किया।
‘कुछ लोग कह रहे हैं कि फ्यूल माइलेज कम हो जाएगा। अब यह बात अच्छी तरह साबित हो चुकी है कि इथेनॉल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी होता है। इससे गाड़ी की रफ्तार पकडऩे की क्षमता (एक्सेलरेशन) बेहतर होती है। इसे क्या कहते हैं? नॉकिंग? नॉकिंग में भी सुधार होता है। माइलेज? हां, यह थोड़ा कम हो सकता है लेकिन कई वजहों से इसमें थोड़ी कमी आ सकती है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘दूसरी बात स्ढ्ढ्ररू और ्रक्र्रढ्ढ समेत सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद हम इस स्टेज पर पहुंचे हैं। फिर कोई कहता है, आपका इंश्योरेंस अब इसे कवर नहीं करेगा। इंश्योरेंस कंपनियों ने पहले ही साफ कर दिया है कि ऐसा कोई मसला नहीं है लेकिन ऐसी गलत बातें फैलाने से किसे फायदा होता है?’ ‘सिर्फ २० प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग होती है’
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए पेट्रोलियम मंत्री ने कहा, ‘मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं लेकिन एक बात बिल्कुल साफ होनी चाहिए। भारत के बढ़ते कंज्यूमर मार्केट में सभी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ चलने की काफी गुंजाइश है। यहां इलेक्ट्रिक गाडिय़ों और बायोफ्यूल-ब्लेंडेड गाडिय़ों के लिए जगह है और अभी हम सिर्फ २० परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग पर हैं। अगर हम २० परसेंट से २५ परसेंट पर जाते हैं तो ऐसा सभी जरूरी टेस्ट पूरे होने के बाद ही होगा। हाइब्रिड गाडिय़ों और सीएनजी गाडिय़ों के लिए भी काफी गुंजाइश है।’
पुरी ने कहा कि ज्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण से माइलेज थोड़ी कम हो सकती है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कई वजहों से हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘ई-व्हीकल, बायो-फ्यूल वाले वाहनों वगैरह के लिए काफी गुंजाइश है।’ उन्होंने आगे कहा कि भारत मौजूदा ई-२० फ्यूल ब्लेंड से आगे तभी बढ़ेगा जब काफी संख्या में टेस्ट हो चुके होंगे।
तेल कंपनियों को कितना नुकसान हुआ?
मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां भारी नुकसान का सामना कर रही हैं। पुरी ने कहा कि ३० जून तक की अवधि में जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें तेजी से बढ़ीं, तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री लागत से कम कीमत पर करने के कारण ७४,७८१ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
अप्रैल-जून २०२६ की अवधि में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी १,८८,८७१ करोड़ रुपये तक पहुंच गई। तब से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं फिर भी कंपनियां अभी भी उस स्टॉक को प्रोसेस कर रही हैं जिसे संकट के चरम पर खरीदा गया था। मंत्री ने बताया, ‘हम आज कच्चे तेल के उस स्टॉक का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे हमने दो महीने पहले खरीदा था (उस कीमत पर जो दो महीने पहले थी)।’
कब होगी तेल के दामों में कटौती?
जब उनसे रिटेल फ्यूल की कीमतों में संभावित कटौती के बारे में पूछा गया तो पुरी ने कहा कि अभी यह सिर्फ एक संभावना है। उन्होंने कहा, ‘अगर यह (गिरावट) २-३ महीने तक जारी रहती है तो हम देखेंगे लेकिन अभी यह सिर्फ एक संभावना है।’
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका में ई१० का इस्तेमाल होता है, ई१५ का दायरा बढ़ रहा है और लाखों फ्लेक्स-फ्यूल गाडिय़ां ई८५ तक के ईंधन पर चल रही हैं। ब्राजील ई२७ के अनिवार्य इस्तेमाल और ज्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण की योजनाओं के मामले में सबसे आगे है और वहां कई नई गाडिय़ां फ्लेक्स-फ्यूल वाली हैं जो १०० प्रतिशत तक इथेनॉल पर चल सकती हैं।








