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घटना के साइबेरिया के एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की है। महिला इसी संस्थान में काम करती थी। मौत के बाद उसके संपर्क में आए लोगों को निगरानी में रखा गया है।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक अस्पताल में महिला ने बताया था कि लैब में काम करते समय उससे जीवित जैविक नमूनों वाली एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी।

टेस्ट ट्यूब में क्या था, अभी पता नहीं
टेस्ट ट्यूब में किस तरह का जैविक नमूना था, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में इसे प्लेग से जुड़े नमूने से जोड़ा गया है, लेकिन रूसी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
रूस की स्वास्थ्य एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने कहा कि महिला के सैंपल में उसके लैब के काम से जुड़े सूक्ष्मजीव नहीं मिले। एजेंसी के मुताबिक, लैब में खतरनाक जीवाणुओं के साथ काम करते समय किसी हादसे की भी पुष्टि नहीं हुई है।
मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने इमरजेंसी मीटिंग की
महिला की मौत के बाद सवाल उठ रहा है कि उसे आखिर कौन सा संक्रमण हुआ था। उसे गंभीर निमोनिया था, लेकिन बीमारी की वजह पता नहीं चल सकी। इसके बाद अधिकारियों ने इमरजेंसी मीटिंग की।
फिलहाल इसे अज्ञात कारणों वाला निमोनिया माना जा रहा है। स्थानीय रिपोर्टों में इसे अज्ञात वायरस से जोड़ा गया है, लेकिन रूस ने किसी खास वायरस की पुष्टि नहीं की है।
रोस्पोट्रेबनादजोर के मुताबिक, महिला के नमूने में उसके काम से जुड़े कोई सूक्ष्मजीव नहीं मिले। एजेंसी ने लैब में किसी दुर्घटना की भी पुष्टि नहीं की है।
सावधानी के लिए लोगों को मास्क पहनने की अपील
लैब के पास मौजूद एक एल्युमिनियम फैक्ट्री ने कर्मचारियों को एहतियात के तौर पर मास्क पहनने को कहा है। फैक्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि घटना के बाद इलाके में कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं।
रूस के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी गेन्नादी ओनिशेंको ने कहा कि फिलहाल यह बीमारी प्लेग लगने की संभावना कम है। उनका कहना है कि अगर प्लेग की पुष्टि भी होती है, तो इसके बड़े पैमाने पर फैलने का खतरा नहीं है।







