शशि कुमार केसवानी, बातें फिल्मी
नमस्कार दोस्तो आइए बात करते है एक ऐसे अभिनेता की जो अनेकोनेक खुबियों से भरा हुआ है। चाहे वो डांस हो, गायिकी हो या फिर स्पोटर्स में क्रिकेट और हॉकी। कव्वाली ऐसी गाते है कि लोगों की कल्पनाओं से ऊपर हिन्दी और उर्दू में कव्वाली गाते-गाते बीच में अंग्रेजी भी चिपका देते है। जिस भी फिल्म में काम किया उसमें अपनी एक अलग छाप छोड़ी। जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा हूं जयदीप अहलावत की। हालांकि बनना तो फौजी था पर किस्मत ने अभिनेता बना दिया। अभिनेता भी ऐसा जो संघर्ष की भट्टी से तपकर निकला। ये बात अलग है कि किसी के चक्कर नहीं लगाए । काम मांगने के लिए किसी के आगे हाथ भी नहीं फैलाए। बगैर किसी गाडफादर के मुंबई में टिक जाना अपने आप में एक बड़ी बात है। नाटक करते-करते इतने मंज गए जिस तरह से भट्टी में जाकर सोना निखर जाता है। अपने अभिनय से सबका दिल जीतने वाले इस अदाकार की जिंदगी आज भी इतनी सादगी से भरी है एक बार मिल लो तो बार-बार मिलने का दिल करता है। हाजिर जवाबी ऐसी कि सामने वाला सोचता ही रह जाए। कई भाषाओं पर पकड़ होने के साथ-साथ अभिनय की अलग विधाओं में महारत रखने वाले जयदीप के लिए उनके दोस्त कहते है नागिन की लचक देखो और जयदीप की लचक देखो। तीन बार एसएसबी में फैल होने के बाद भी अपना हौसलो कायम रखने वाले जयदीप के कुछ अनछुए पहलुओं पर बातें फिल्मी करते है।

जयदीप अहलावत एक भारतीय अभिनेता हैं। उन्होंने बॉलीवुड में अक्षय कुमार निर्मित फि़ल्म आक्रोश (2010) से अभिनय की शुरूआत की, यद्यपि उनका सबसे महत्वपूर्ण अभिनय अनुराग कश्यप की फि़ल्म गैंग्स ऑफ़ वासेपुर (2012) में शाहिद के रूप में रहा। उनका जन्म रोहतक, हरियाणा के गाँव खरकड़ा के एक जाट परिवार में हुआ। उन्होंने सरकारी स्कूल से हाई स्कूल प्रमाणपत्र हासिल किया और जाट कॉलेज, रोहतक से अपनी स्नातक (एमए इंग्लिश लिटरेचर) की पढ़ाई की। 2005 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए किया है. कई बार कोशिश करने के बावजूद जब वो एसएसबी इंटरव्यू पास नहीं कर पाए तो उन्होंने एक्टिंग में करियर बनाने का सोचा। उन्होंने 2008 में स्नञ्जढ्ढढ्ढ से अभिनय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की, जहां राजकुमार राव, विजय वर्मा, सनी हिंदुजा जैसे अभिनेता उनके स्नञ्जढ्ढढ्ढ साथी थे। उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में अपनी स्नातक की शिक्षा भारतीय फिल्म और टेलिविजऩ संस्थान से 2008 में पूर्ण की। जयदीप अहलावत ने अपने स्नातक के बाद अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने प्रथम अभिनय प्रियदर्शन की फि़ल्म खट्टा मि_ा (2010) में खलनायक के रूप में किया। उसी वर्ष वो अजय देवगन के साथ फि़ल्म आक्रोश में नजर आये। उन्होंने 2010 की फिल्म आक्रोश में छोटी भूमिका निभाते हुए बॉलीवुड में अपना करियर शुरू किया और उसी वर्ष, उन्होंने खट्टा मीठा नाम के एक व्यंग्यात्मक कॉमेडी फिल्म में भी अभिनय किया, जिसके लिए सराहना मिली. हालांकि उनकी फिल्मों में चटगांव (2011), रॉकस्टार (2011), गैंग्स ऑफ़ वासेपुर (2012), कमांडो : अ वन मैन आर्मी, आत्मा (2013), गब्बर इज बैक (2015), मेरठिया गैंगस्टर्स (2015), विश्वरूपम 2 शामिल है. आलिया भट्ट-स्टारर फिल्म राजी और अमेजॉन प्राइम वेब सीरीज पाताल लोक में भूमिका निभाने के लिए उन्हें व्यापक पहचान मिली. इस सीरीज में पहली बार फि़ल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरुष मिला. वह शाहरुख खान की फिल्म रईस में भी दिखाई दिए थे । जयदीप अहलावत की गिनती बॉलीवुड के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में होती है। हाल ही में फिल्म वेल थीफ को लेकर चर्चा में रही। फिल्म में उनका किरदार नकारात्मक था। इस फिल्म में उनके साथ सैफ अली खान और निकिता दत्ता भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। खास बात यह है कि यह फिल्म सिनेमाघरों में नहीं, बल्कि सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुर्ई। ‘ज्वेल थीफ’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखा गया। इस बीच आज हम बात करेंगे जयदीप अहलावत के उन शानदार नेगेटिव किरदारों की, जिन्होंने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई। कमांडो: फिल्म ‘कमांडो’ में जयदीप अहलावत ने एक खूंखार विलेन का किरदार निभाया था। इस एक्शन से भरपूर फिल्म में विद्युत जामवाल के साथ उनकी टक्कर देखने लायक थी। जयदीप का किरदार इतना दमदार था कि उन्होंने अपने अभिनय से हर सीन में जान डाल दी थी। उनकी खतरनाक मुस्कान और ठंडे दिमाग वाले विलेन के रोल ने दर्शकों गहरी छाप छोड़ी। इस फिल्म ने जयदीप को एक भरोसेमंद खलनायक के रूप में स्थापित किया। एन एक्शन हीरो : ‘एन एक्शन हीरो’ में जयदीप ने एक बार फिर विलेन के रूप में अपने अभिनय का जादू दिखाया था। इस फिल्म में उन्होंने एक चालाक और खतरनाक किरदार निभाया, जो आयुष्मान खुराना के किरदार के पीछे पड़ा था। जयदीप की खासियत यह थी कि उन्होंने इस रोल को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया, लेकिन फिर भी उनका डर दर्शकों के दिलों में बना रहा। इस फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग और खलनायकी का फैंस को खूब पसंद आई। महाराज : ‘महाराज’ में जयदीप अहलावत ने एक ऐसे विलेन का किरदार निभाया था जो समाज में अपनी ताकत और चालाकी से लोगों को गुमराह करता है। यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित थी। जयदीप ने अपने किरदार को इतनी सच्चाई से निभाया कि दर्शक उनके अभिनय के कायल हो गए। उनके डायलॉग्स और स्क्रीन प्रेजेंस ने इस फिल्म को और भी खास बना दिया। बागी 3 : ‘बागी 3’ में जयदीप ने टाइगर श्रॉफ के सामने एक खतरनाक आतंकी का किरदार निभाया था। इस एक्शन फिल्म में उनका रोल छोटा, लेकिन प्रभावशाली था। जयदीप ने अपने सीमित स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ी और साबित किया कि वे किसी भी किरदार को यादगार बना सकते हैं। जयदीप अहलावत हीरो नहीं फौजी बनकर देश की सेवा करना चाहते थे, बिना किसी गॉडफादर के किया मुकाम हासिल : पॉपुलर एक्टर जयदीप अहलावत ने इस वक्त ओटीटी प्लेटफॉर्म पर गर्दा उड़ा रखी है। पताल लोक 2 में अपनी दमदार एक्टिंग की वजह से वो सुर्खियों में हैं। लेकिन एक्टिंग से पहले जयदीप किसी और प्रोफेशन में करियर बनाना चाहते थे। एक समय होता है जब अभिनेता पहचान पाने के लिए संघर्ष करता है। वह उस रोल का इंतजार करता है जो उसकी तकदीर बदल दे। उस रोल से लोग उसे जानने और समझने लगें। कई बार ऐसा होता है कि जिन एक्टर्स को फिल्मों से वो पहचान नहीं मिल पाती उनके लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म कमाल कर देता है। ऐसा ही कुछ हुआ हमारे पाताल लोक अभिनेता हाथीराम चौधरी के साथ।
इस सीरीज ने रातों रात एक्टर की किस्मत बदल दी। लोग उन्हें जानने लगे और एक दमदार अभिनेता के तौर पर उनकी छवि लोगों की नजरों में बनी। ओटीटी से मिली अलग पहचान : जयदीप के अभिनय करियर की शुरुआत 2008 में शॉर्ट फिल्म नर्मीन में गेस्ट अपीयरेंस के साथ की थी। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों में रोल मिलने लगे जिनमें अजय देवगन की आक्रोश, अक्षय कुमार की खट्टा मीठा, रणबीर कपूर की रॉकस्टार और कई अन्य शामिल हैं। हालांकि, ओटीटी प्लेटफॉर्म उनके लिए लकी साबित हुआ और इसने जयदीप को भीड़ में अलग पहचान दिलाई। उन्हें द ब्रोकन न्यूज, द बार्ड ऑफ ब्लड, ब्लडी ब्रदर्स और पाताल लोक से वो खोई पहचान मिली। इसके अलावा वेब सीरीज गैंग्स ऑफ वासेपुर में जयदीप अहलावत एक छोटे से किरदार में नजर आए थे लेकिन उनके काम को काफी सराहा गया था। पाताललोक एक्टर जयदीप अहलावत ने हाल ही में एक इंटरव्यू में एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें न्यूयॉर्क में 20 पुलिसवालों ने घेर लिया था। वो बताते हैं कि वो बस प्रार्थना कर रहे थे कि भगवान गोली मत चलवाना। बॉलीवुड एक्टर जयदीप अहलावत का नाम इंडस्ट्री के शानदार एक्टर्स में लिया जाता है। उन्होंने कई फिल्मों और सीरीज में काम किया है। जयदीप अहलावत ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी शूटिंग से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे एक बार वो न्यूयॉर्क में शूटिंग कर रहे थे और पुलिसवालों ने उन्हें घेर लिया था। वो उनके सामने बंदूक लेकर आ गए थे। जयदीप ने बताया कि वो भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि बस आज गोली मत चलवाना।
जयदीप अहलावत ने सुनाया किस्सा : हमसे बातचीत में जयदीप अहलावत ने बताया कि वो कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम के लिए न्यूयॉर्क में शूटिंग कर रहे थे। एक सीन में तीन गाडिय़ां एक ब्रिज से गुजरनी थीं। उस सीन के लिए उन्हें तीन टेक लगे। तीसरा टेक जब वो कर रहे थे तो न्यूयॉर्क पुलिस को कुछ संदिग्ध लगा। इसके बाद वहां कम से कम 20 पुलिसवाले आकर उन्हें घेर लेते है।
जयदीप ने बताया, हम शूट कर रहे थे विश्वरूपम, कमल हासन उसे डायरेक्ट कर रहे थे। मैनहैटन न्यूयॉर्क वाला जो हिस्सा है और न्यू जर्सी का एक ब्रिज है जिसके ऊपर से हमें गाड़ी चलानी है, मैं गाड़ी चला रहा हूं और बगल में राहुल बोस जी बैठे हैं। उसी में पीछे कैमरा रखा हुआ है। बड़ा एकदम तोप जैसा अंदर लगा हुआ। गाड़ी में एक कैमरामैन कमल जी और एक एडी बैठा था। आगे एक गाड़ी चल रही थी जिसमें प्रोडक्शन के लोग हैं, पीछे एक गाड़ी चल रही जिसमें एडी बैठे हैं, मॉनिटर के साथ, साउंड डिपार्टमेंट बैठा हुआ है।
जयदीप ने आगे बताया, जैसे वो बड़ी वाली गाडिय़ां होती हैं ना, एसयूवी जो बड़ी वाली हम देखते हैं अमेरिकी फिल्मों में, गैंगस्टर वाली जो, ब्लैक शीशा… शूट की जरूरत वो थी। हम लोग ब्रिज पर घुसे, एक दम ब्रिज के ऊपर टोल है। हमने टोल पर पैसे-वैसे दिए। तीनों गाडिय़ां एक साथ निकलीं। फिर हमें बोला गया कि गाडिय़ा नॉर्मल स्पीड पर रखो ताकी ब्रिज के ऊपर ही सीन खत्म हो जाए। एक टेक हुआ, वो थोड़ा सा नहीं समझ आया। कमल सर बोले कि एक बार दोबारा घूम के आते हैं। जयदीप ने बताया कि घूम कर आने पर आधा घंटा लगता है। वो लोग घूम के आए और इस बार गाडिय़ों की स्पीड और कम रखी। बाकी गाडिय़ां वहां तेज चल रही थीं। वो दिख रहा था कि तीन गाडिय़ां एक जैसी दूरी बनाकर चल रही हैं, वो दिख रहा था कि एक स्क्वाड चल रहा है।
जो लोग रामायण-महाभारत से नहीं सीखे, वो सिनेमा से क्या सीखेंगे…
फिल्में लोगों को प्रेरित करती हैं ये बात हम सभी काफी समय से सुनते आ रहे हैं. कई लोग फिल्में देखकर कई सारी वारदातों को भी अंजाम देेते हैं जिससे समाज खराब होता है. लेकिन क्या सच में लोग फिल्मों से प्रेरित होते हैं? ऐसा कहा जाता है कि फिल्में हमें प्रेरित करती हैं. वो हमारे दिमाग में समाज की एक छवि बनाती हैं. हमें इस दुनिया की असलियत से रूबरू कराती है. लेकिन क्या सच में फिल्में समाज को बदलने का काम करती है? बॉलीवुड एक्टर जयदीप की सोच इस मुद्दे पर थोड़ी अलग है. कुछ समय पहले जयदीप ने एक बातचीत में हमसे बताया था उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की एक्टिंग की बारीकियों पर बातें की. इसी बीच एक सवाल ये भी उठा कि क्या फिल्में समाज की सोच बदलने का काम करती हैं या नहीं? तो इसपर जयदीप ने भी अपना पक्ष रखा. एक्टर ने कहा था, अगर हम रामायण महाभारत से कुछ नहीं सीख पाए, तो मिर्जापुर सीजन 1 या 3 हमें नहीं सिखा सकता है. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि कोई इंसान दरिंदगी और बदतमीजी फिल्मों और सीरीज से ही सीखता है. वो कई बुरे कामों को अंजाम समाज में शामिल फिल्में देखकर ही देता है. लेकिन जयदीप का मानना है कि 140 करोड़ देशवासियों की जिम्मेदारी अकेली सिनेमा पर थोपना गलत है.
उन्होंने कहा- 140 करोड़ की जिम्मेदारी आप सिनेमा पर नहीं डाल सकते. आपके समाज में ही कुछ गड़बड़ है. कोई भी उठकर ये नहीं कहेगा कि मुझे मिर्जापुर का गुड्डू भईया बनना है. और अगर उसके अंदर ये खयाल आया है, वो गुड्डू भईया को देखकर नहीं आया. वो पहले से ही वैसा था. वो पहले से किसी से प्रेरित था, बस एक बहाना ढूंढ रहा था. अगर हमारा सिनेमा लोगों को बदलने में कामयाब होता तो ये स्थिति ऐसी नहीं होती. हम सिनेमा समाज से बनाते हैं, समाज से सिनेमा नहीं बनता. जो राइटर्स लिखते हैं वो सब समाज में पहले से पड़ा हुआ है. जयदीप की ये बात कई लोगों को सोच में डाल रही है. पिछले काफी समय में देश में कई ऐसी वारदात भी हुई हैं जिसके बाद समाज ने सबसे पहला कसूरवार फिल्मों को ठहराया है. माना जाता है कि कई सारी वारदात फिल्मों में दिखाए सीन्स से प्रेरित होती हैं. आपका इस मुद्दे पर क्या विचार है? क्या सचमुच सिनेमा से लोग प्रेरित होकर खुद को बदलते हैं?







