शशी कुमार केसवानी
बातें फिल्मी
नमस्कार दोस्तों, आइए आज हम बात करते हैं एक ऐसे अभिनेत्री की जो हमारे जमाने में हर दिल के अंदर धडक़ती थी। ये बात अलग है उस वक्त भी उम्र में हमसे कुछ बरस बड़ी ही थी। पर उनकी अदाकारी के दिवाने क्या जवान और क्या बुढ़े सबको दिवाना बनाकर रख दिया था। मुझे याद है कई बुजुर्ग महिलाएं अपनी बेटी या बहु के रूप में मौसमी को देखती थी। एक तो बंगाली महिला और ऊपर से सादगी से भरी हुई तो स्वाभाविक ही था कि हर दर्शक के दिल में घर बनाना ये बात अलग है 14-15 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई और उनके ससुर हेमंत कुमार ने उन्हें हिंदी फिल्मों में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। बाद में यही कारण विवाद का विषय भी बना। अक्सर परिवारों में सफलता के बाद कुछ न कुछ विवाद खड़े होते ही है। पर छोडि़ए जनाब ये तो घर-घर की कहानी है। अपन तो मौसमी की ही बात करते है । मौसमी की फिल्म रिलीज होते ही पहले दिन जो भी दर्शक फिल्म देखने जाते थे उनके मन के पीछे मौसमी ही रहती थी चाहे वो किसी भी हीरों का नाम लेकर या कहानी की बात करके फिल्म देखने जाएं। मुझे आज भी याद है उस जमाने के अधेड़ लोग उसके अभिनय की किसी तरह से तारीफ करते थे। उस तरह से बयां करना मेरे लिए भी जरा मुश्किल है। हां पर बातें जब याद आती है तो मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ ही जाती है तो आइए आज बात करते हैं एक ऐसी ही हरदिल अजीज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी की।
अपने को-स्टार्स से फ्लर्ट करती थीं मौसमी
70 और 80 के दशक में अपनी सिंपल ब्यूटी से लोगों का दिल जीतने वाली एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी ने बॉलीवुड की उस विचारधारा को हमेशा के लिए बदल दिया था, जिसमें कहा जाता था कि शादी के बाद एक्ट्रेसेस सक्सेसफुल नहीं हो पाती हैं। मौसमी एक ऐसी अभिनेत्री थीं, जिन्हें अपने एक्सप्रेशन दिखाने के लिए नकली चीजों की जरूरत नहीं होती थी। वो अपने अभिनय को जीती थीं और फिर जो उनका एक्सप्रेशन स्क्रीन पर आता था, वो वाकई लोगों के आंखों में आंसू ला देता था। महज 18-19 साल की उम्र में आॅन-स्क्रीन मां बनने से लेकर कैरेक्टर रोल तक में मौसमी ने अपने अभिनय का खूब जलवा बिखेरा। आज हम आपको मौसमी चटर्जी की पूरी जिंदगी के पहलुओं को अपने इस आर्टिकल के जरिए समझाने की कोशिश करेंगे। 26 अप्रैल 1955 को कोलकाता में जन्मी मौसमी का असली नाम इंदिरा चटर्जी है और ये नाम एक्ट्रेस की बहन ने उन्हें दिया था। उनके पिता एक फौजी थे और उनकी मां हाउसवाइफ थीं। मौसमी बचपन से ही एक्टिंग की दीवानी थीं। वो हमेशा से एक बेहतरीन एक्ट्रेस बनना चाहती थीं और वो बनीं भी। मौसमी कोलकाता में जहां रहती थीं, वहां कई फिल्म स्टूडियोज थे। एक दिन मौसमी वहां से गुजर रही थीं, तभी मौसमी पर उन दिनों के मशहूर फिल्म मेकर तरुण मजूमदार की नजर पड़ी और उन्होंने उसी वक्त मौसमी को अपनी बंगाली फिल्म बालिका वधू के लिए चुन लिया। मौसमी, जो बचपन से ही फिल्मों में काम करना चाह रही थीं, आखिरकार उनका वह सपना 1967 में बालिका वधू से पूरा हुआ। जब मौसमी इस फिल्म में काम कर रही थीं, उस वक्त उन्होंने अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी। उनकी इस फिल्म में मौसमी के लाजवाब अभिनय ने लोगों को अपना कायल बना दिया था। फिल्ममेकर्स और डायरेक्टर्स उन्हें अपनी फिल्म में साइन करने के लिए बेताब थे, लेकिन एक्ट्रेस के पिता नहीं चाहते थे कि, मौसमी एक्टिंग करें। मौसमी चटर्जी का रिश्ता उनके पिता ने अपने पड़ोसी हेमंत कुमार के बेटे व उस वक्त मशहूर संगीतकार जयंत मुखर्जी (बाबू) के साथ तय कर दिया। दोनों ने बिना देर किए सगाई कर ली। भले ही कहने को ये अरेंज मैरिज थी, लेकिन मौसमी को अपने पति ‘बाबू’ से प्यार हो गया था। एक इंटरव्यू में मौसमी ने कहा था, मुझे बाबू से प्यार हो गया। वो पहले ऐसे शख्स थे, जिनके साथ मैं अपने परिवार के अलावा टच में थी। उस वक्त एक्ट्रेस फिल्म परिणीता में काम कर रही थीं।
फिल्म भोला भाला (1978) के दौरान दो हीरोइन एक फिल्म में होने के कारण यहां एक-दूसरे से कॉम्पिटिशन स्वभाविक था। बात तब बढ़ी जब खबरें आईं कि मौसमी चटर्जी ने फिल्म निर्माताओं को अल्टीमेटम दे दिया कि फिल्म में उनका नाम रेखा से पहले दिया जाए। मौसमी से सवाल किए तो उनका कहना था कि मैंने ऐसा कोई अल्टीमेटम नहीं दिया। मैं दूसरी हीरोइनों की तरह पब्लिसिटी की भूखी नहीं हूं। मैं नाम में नहीं, काम में विश्वास रखती हूं। जहां तक काम का संबंध है, मैं समझती हूं कि मैं रेखा से गई गुजरी नहीं हूं। फिर भी यह जरूरी है कि मेरा नाम उससे पहले दिया जाए। इसमें हर्ज भी क्या है।

मौसमी चटर्जी के बच्चे
शादी के बाद महज 18 साल की उम्र में मौसमी चटर्जी ने अपनी पहली बेटी पायल चटर्जी (दिवंगत) को जन्म दिया था। मौसमी ने उस वक्त अपने करियर की ऊंचाइयों को छुआ ही था कि, उनकी गोद में नन्ही पायल आ गईं। कई लोग मौसमी के डूबते करियर का दोष कम उम्र में ही उनके बच्चों के जन्म को देते हैं। इस बारे में मौसमी ने जवाब देते हुए कहा था, कुछ लोग मुझे कहते हैं कि, शुरूआती करियर में बच्चों के होने की वजह से मेरा करियर डूबा और ये मेरा करियर मिस्टैक था, लेकिन मैं ये नहीं मानती हूं।’ मौसमी की दो बेटियां हुईं, जिनका नाम पायल (साल 2019 में देहांत) और मेघा (एक्ट्रेस) है। बॉलीवुड में अक्सर अभिनेत्रियां शादी के बाद फिल्मी दुनिया से दूरी बना लेती हैं। इसके बहुत कारण होते हैं, जिनमें से पति को उनकी वाइफ का फिल्मों में काम करने से आपत्ति होना भी होता है। लेकिन इस जगह मौसमी बहुत किस्मत वाली निकलीं मौसमी ने कहा था, मैं बहुत किस्मत वाली हूं, क्योंकि शादी के बाद मेरे पति व ससुर ने मुझे फिल्मों में काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मेरे स्किल्स को पहचाना और मुझे शादी के बाद भी काम करने की इजाजत दी पति व ससुर के द्वारा लगाए गए पंखों के साथ मौसमी चटर्जी ने बॉलीवुड की ओर रुख किया। बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर शक्ति सामंत ने अपनी फिल्म अनुराग में मौसमी को कास्ट किया। इस फिल्म में उन्हें एक अंधी लड़की का किरदार निभाना था, जिसे अपने हीरो से प्यार हो जाता है। ये फिल्म उस वक्त सुपरहिट साबित हुई थी।
मौसमी चटर्जी का करियर
मौसमी चटर्जी ने अपने डेढ़ दशक के करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि उन्होंने अपने करियर के दौरान सभी सुपरस्टार्स के साथ काम किया था। मौसमी ने शशि कपूर, विनोद खन्ना, विनोद मेहरा, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जीतेंद्र, राकेश रोशन समेत कई सफल अभिनेताओं के साथ स्क्रीन शेयर किया। हालांकि, मौसमी को असली स्टारडम साल 1974 में आई मनोज कुमार की फिल्म रोटी, कपड़ा और मकान से मिला था। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था। इसके बाद उन्होंने स्वर्ग नरक, मांग भरो सजना, प्यासा सावन, ज्योति बने ज्वाला, स्वयंवर और आनंद आश्रम जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। मौसमी चटर्जी ने उस वक्त सबसे ज्यादा एक्टर विनोद मेहरा के साथ काम किया था। मौसमी और विनोद ने एक साथ 10 फिल्मों में काम किया, जिसमें दोनों की जोड़ी को खूब पसंद किया गया। हिंदी फिल्मों में अपने टैलेंट का जलवा दिखाने के बाद मौसमी ने मराठी फिल्मों में भी काम किया। लेकिन धीरे-धीरे मौसमी का करियर डूबने लगा और साल 1985 के बाद से उन्हें फिल्मों में सपोर्टिंग रोल मिलने लगा। उन्होंने वतन के रखवाले, आग ही आग और घायल जैसी कई फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं हैं, जिसमें भी उन्हें अच्छी पहचान मिली है। अपने फिल्मी करियर में लाजवाब अभिनय करने वालीं मौसमी को साल 2015 में फिल्मफेयर की तरफ से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिल चुका है। मौसमी और उनके पति जयंत मुखर्जी को जब काफी समय तक एक-दूसरे के साथ नहीं देखा गया, तो लोगों के बीच कयास लगाए जाने लगे कि मौसमी और उनके पति बाबू यानी जयंत एक-दूसरे से अलग रहने लगे हैं। हालांकि, मौसमी ने इन सभी अफवाहों को खारिज कर दिया था।
मौसमी चटर्जी का राजनीतिक करियर
मौसमी चटर्जी ने फिल्मी दुनिया में अपने करियर को ऊंचाइयों में पहुंचाने के बाद अब राजनीति में कदम रखने का फैसला किया है। साल 2019 में मौसमी ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है। इससे पहले, मौसमी ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी। उन्होंने साल 2004 में बंगाल से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें शिकस्त
हासिल हुई थी।
कहा जाता है कि, मौसमी व्यवहार से काफी चुलबुली हैं और वो फिल्मों की शूटिंग के दौरान सेट को काफी टेंशन फ्री कर देती थीं। मौसमी पहली ऐसी अभिनेत्री रहीं हैं, जिनका किसी भी स्टार्स के साथ कोई अफेयर नहीं रहा और ना ही खबरें आई हैं। हालांकि, व्यवहार से टॉम ब्यॉइश होने के नाते उनकी अभिनेताओं से अच्छी दोस्ती रही है। लेकिन, वो अपने को-स्टार्स से फ्लर्ट जरूर किया करती थीं। मौसमी से उनके को-स्टार्स के द्वारा फ्लर्ट किए जाने की बात पूछी थी, तब एक्ट्रेस ने कहा था कि, स्टार्स नहीं बल्कि वो खुद दूसरों से फ्लर्ट करती थीं। मौसमी ने कहा था, कभी-कभी उन्होंने किया, लेकिन सबसे ज्यादा मैं उनके साथ फ्लर्ट करती थी। शबाना ने एक बार मुझसे कहा था कि मुझमें 6 साल से लेकर 60 साल के बच्चे तक सबके साथ फ्लर्ट करने की क्षमता है। जब मैं सेट पर होती हूं, तब भी मैं सबके साथ फ्लर्ट करती हूं लेकिन मैं यह सुनिश्चित करती हूं कि यह हानिरहित हो। मैं स्टूडियो में गंभीर नहीं हो सकती हूं। मौसमी के बारे में कहा जाता था कि वो बिना ग्लिसरीन के ही रो पड़ती थी। बिना ग्लिसरीन के ही रो पड़ने के सवाल पर एक बार मौसमी ने बातचीत में कहा था, ‘हां ये सच है।
ये भी ऊपरवाले का दिया हुआ एक वरदान है। जब किसी दृश्य में मुझे रोना होता था तो मैं सोचती थी कि ये मेरे साथ सच में हो रहा है और मैं रो पड़ती थी।’
मौसमी चटर्जी अपने स्माइल से हर किसी को दीवाना बना देती थी लेकिन एक्ट्रेस को जब गुस्सा आता था तो अच्छे-अच्छे एक्टर उनके सामने कुछ नहीं बोल पाते थे। कुछ ऐसा ही हुआ था फिल्म दामिनी के सेट पर। फिल्म दामिनी में सनी देओल, मीनाक्षी शेषाद्री, राज बब्बर और मौसमी चटर्जी अहम रोल में थे। जब यह फिल्म बनी थी उस समय मौसमी ने फिल्मों से दूरी बना ली थी लेकिन धर्मेंद्र के आग्रह करने पर मौसमी ने फिल्म के लिए हामी भर दी थी। बता दें कि मौसमी चटर्जी और धर्मेंद्र अच्छे दोस्त हैं। फिल्म में मौसमी ने सनी के भाभी का किरदार निभाया था। उस समय सनी नए-नए एक्टर थे, वह फिल्म सेट पर ज्यादा प्रोफेशल व्यवहार नहीं कर पाते थे और शूट पर लेट आने के बावजूद भी ज्यादा समय फोन पर भी बिताते थे। एक दिन मौसमी और सनी देओल का साथ में शूट फिल्माया जाना था। एक्ट्रेस टाइम पर आकर सनी का इंतजार करने लगी, सनी आए और फोन पर लग गए। पहले तो मौसमी ने फिल्म डायरेक्टर राजुकमार संतोषी को सनी को बुलाने को कहा लेकिन तब भी एक्टर नहीं आए।
जिसके बाद मौसमी का गु्स्सा फूटा और उन्होंने सनी से जाकर कहा कि तुम फिल्मों में काम करने के लायक ही नहीं हो, पंजाब जाकर कुछ काम कर लो। अपने पिता धर्मेंद्र जी का नाम खराब मत करो। मौसमी के इस गुस्से को देख सनी भी दंग रह गए और फिर सीधा शूट के लिए पहुंच गए। थोड़ी देर मनाने के बाद मौसमी शूट के लिए मानी और फिर शूट पूरा हुआ।







