TIO, वॉशिंगटन

भारतीय मूल की नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने भारत को महान देश बताया है। उन्होंने भारत से जुड़ी अपनी यादों का भी जिक्र किया। दरअसल, सुनीता विलियम्स मीडिया से रूबरू हुईं। इस दौरान ज्यादातर भारत से जुड़े सवाल ही उनसे पूछे गए। उनसे पूछा गया कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है। उन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है। यह रोशनी के नेटवर्क जैसा दिखता है। गुजरात, महाराष्ट्र से लेकर सभी छोटे-बड़े शहर और समुद्र… यह अद्भुत है।

उन्होंने कहा, ‘भारत अद्भुत है। हर बार जब हम हिमालय के ऊपर से गुजरे और मैं आपको बताऊं, बुच ने हिमालय की कुछ अविश्वसनीय तस्वीरें लीं। बस अद्भुत।’ वह इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि जब वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में थीं तो अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता था। उनसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ उनके सहयोग की संभावना के बारे में पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि जरूर। हम हर जरूरी मदद करेंगे।

संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने अपनी संभावित भारत यात्रा पर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने पिता के देश जाऊंगी। वहां मैं एक्सिओम मिशन पर जाने वाले भारतीय नागरिक से भी मुलाकात करूंगी। मैं उनसे कभी न कभी जरूर मिलूंगी। हम उनके साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। भारत एक महान देश है। वहां एक शानदार लोकतंत्र है, जिसने अंतरिक्ष जगत में अपने कदम जमा लिए हैं। हम इसका हिस्सा बनना और उनकी मदद करने में जरा भी नहीं हिचकिचाएंगे।’ हालांकि, सुनीता विलियम्स की भारत यात्रा की तारीख अब तक तय नहीं है।

नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में फंसी रहीं
59 साल नासा अंतरिक्ष यात्री और साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर ने स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन के हिस्से के रूप में पृथ्वी पर लौटने के कुछ दिनों बाद अपने पहले संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात की। दोनों नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में फंसे रहे थे।

एक्सिओम मिशन 4 के बारे में जानिए
उन्होंने एक्सिओम मिशन 4 (एक्स-4) वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्री मिशन का भी जिक्र किया। इसमें भारत के मिशन पायलट शुभांशु शुक्ला भी शामिल होंगे। लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला 1984 के बाद से अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी राकेश शर्मा के बाद भारत की दूसरी अंतरिक्ष यात्री होंगे।

भारत को लेकर क्या-क्या कहा?
उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले भी बताया है, यह लहर की तरह है। यह भारत में नीचे की ओर बहती है। यह कई रंगों में है। मुझे लगता है कि जब आप पूर्व से आते हैं, गुजरात और मुंबई की तरफ, वहां के तट से दूर मछली पकड़ने का बेड़ा आपको थोड़ा सा संकेत देता है कि हम यहां आ गए हैं। फिर पूरे भारत में मुझे जो आभास हुआ, वह बड़े शहरों से छोटे शहरों में नीचे जाने वाली रोशनी के एक नेटवर्क की तरह है। रात के साथ-साथ दिन के समय भी देखना अविश्वसनीय है।’

भारत से खास नाता
सुनीता के पिता दीपक पांड्या गुजरात से थे और 1958 में अमेरिका आए थे। यहां उन्होंने क्लीवलैंड, ओहियो में मेडिसिन में इंटर्नशिप और रेजीडेंसी ट्रेनिंग की। सुनीता का जन्म ओहियो में दीपक और उसुर्लाइन बोनी पांड्या के घर हुआ था।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER