TIO नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्रियों ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपनी संपत्तियों का ब्योरा दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की वेबसाइट पर जारी जानकारी के मुताबिक मंत्रियों के पास क्रिप्टोकरेंसी, सोने-चांदी के जेवर, म्यूचुअल फंड और हथियार जैसी चीजें भी संपत्ति में शामिल हैं।
परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 31 साल पुरानी एम्बेसडर कार समेत तीन गाड़ियां और 37 लाख रुपए से ज्यादा की सोने की ज्वेलरी घोषित की है। उनकी पत्नी कंचन नितिन अधिकारी के पास 28 लाख रुपए से ज्यादा की सोने की ज्वेलरी है।
कौशल विकास राज्य मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने 31 मार्च 2025 तक 21.31 लाख रुपए की क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट घोषित की है। उनकी पत्नी चारु सिंह के पास 22.41 लाख रुपए की डिजिटल एसेट्स हैं।
जयंत चौधरी ऐसे इकलौते मंत्री हैं जिन्होंने क्रिप्टोकरेंसी को अपनी संपत्ति में शामिल किया है। भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अभी स्पष्ट नियम नहीं हैं। रिजर्व बैंक कई बार वर्चुअल करेंसी के जोखिमों को लेकर चेतावनी दे चुका है।

सीतारमण के पास 27 लाख की ज्वेलरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 लाख की ज्वेलरी, 19 लाख के म्यूचुअल फंड बताए हैं। राव इंदरजीत सिंह ने 1.2 करोड़ से ज्यादा की 1,679 ग्राम सोने की ज्वेलरी, 10 किलो चांदी-हीरे की ज्वेलरी घोषित की।
वीरेंद्र कुमार के पास 37 साल पुराना स्कूटर
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने 37 साल पुराना स्कूटर और एक रिवॉल्वर अपनी संपत्ति में बताया है। रेल और फूड प्रोसेसिंग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 1997 मॉडल की मारुति कार घोषित की है।
सावित्री ठाकुर के पास डबल बैरल गन
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने रिवॉल्वर, राइफल, ट्रैक्टर और करीब 1 करोड़ रुपए के म्यूचुअल फंड बताए हैं। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने डबल बैरल गन, रिवॉल्वर और 67 लाख रु. से ज्यादा की सोने की ज्वेलरी घोषित की है।
शिवराज सिंह के पास रिवॉल्वर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास 8.98 करोड़ की संपत्ति है। उनके पास 1 रिवॉल्वर, 1 पुरानी एंबेसडर कार है। वहीं, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास 374 करोड़ की संपत्ति है। इनके पास एक पुरानी बीएमडब्ल्यू भी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजों की संपत्ति का ब्यौरा अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया कि ज्युडिशियरी में ट्रांसपेरेंसी और जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि वेबसाइट पर 33 में से केवल 21 जजों की जानकारी ही देखी जा सकती है। बाकी जजों ने ब्योरा केवल सुप्रीम कोर्ट को सौंपा है।







