TIO, वाशिंगटन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो अप्रैल से कई देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ यानी जवाबी आयात शुल्क लगाने का एलान करने जा रहे हैं। ट्रंप ने इस दिन को खास नाम भी दिया है- लिबरेशन डे यानी आजादी दिवस। हालांकि, उनके इस एलान को आर्थिक मामलों के जानकार ने दुनिया के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ने का दिन करार दिया है।

दरअसल, ट्रंप का कहना है कि कई देश अमेरिकी उत्पादों पर जबरदस्त टैरिफ लगाते हैं, वहीं अमेरिका उन देशों के उत्पादों पर कम आयात शुल्क वसूलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि इसकी वजह से अमेरिका को 1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा उठाना पड़ता है, जो कि अमेरिकी उद्योगों और कामगारों के लिए नुकसान देह है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप आज आयात शुल्क पर क्या बड़े एलान कर सकते हैं? उनके टैरिफ से जुड़े एलानों की जद में कौन-कौन से देश आ सकते हैं? ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का भारत पर क्या असर होगा और देश के कौन-कौन से उद्योगों पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने की संभावना है? इसके अलावा ट्रंप के टैरिफ लगाने के एलान से अमेरिका को फायदा होगा या नुकसान? आइये जानते हैं…

क्या हो सकते हैं ट्रंप के बड़े फैसले?
खुद अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, वह उन सभी देशों पर जवाबी टैरिफ का एलान करने वाले हैं, जो देश अमेरिकी उत्पादों के आयात पर शुल्क वसूलते हैं। ट्रंप का साफ कहना है कि वह हर देश पर उतना ही टैरिफ लगाएंगे, जितना सामने वाला देश अमेरिका के उत्पादों पर लगाता है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के आयात शुल्क हर देश में उद्योग दर उद्योग या उत्पाद दर उत्पाद पर निर्भर होंगे। यानी जो उद्योग ज्यादा आयात शुल्क लगाएगा, उसे उतना ही जवाबी टैरिफ झेलना होगा। यानी एक ही देश के अलग-अलग उद्योगों पर अलग-अलग टैरिफ की व्यवस्था की जा सकती है।

ट्रंप प्रशासन के एक और वर्ग का कहना है कि अलग-अलग देशों पर यह टैरिफ औसत के आधार पर भी लगाए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर कोई देश अमेरिकी कारों पर 30% टैरिफ लगाता है और फार्मा सेक्टर पर 20% टैरिफ लगाता है, तो ट्रंप प्रशासन पूरे देश के उत्पादों पर जवाबी औसतन टैरिफ 25 फीसदी कर सकता है। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने रविवार को ही फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका इन टैरिफ से हर साल 600 अरब डॉलर जुटा सकता है, जिसका मतलब है कि सभी देशों पर आयात शुल्क का औसत करीब 20 फीसदी रहेगा।

ट्रंप के टैरिफ की जद में कौन-कौन से देश आ सकते हैं?
ट्रंप ने अब तक कई देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। सबसे पहले उनके निशाने पर चीन, कनाडा और मैक्सिको रहे थे। इसके बाद उन्होंने कई मौकों पर अपने बाकी सहयोगियों- यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया, भारत, ब्राजील, आदि के नाम लिए थे। अपने सबसे ताजा बयान में ट्रंप ने कहा- “हम सभी देशों से शुरूआत करना चाहेंगे। देखते हैं आगे क्या होता है।

उनके इस बयान के बाद यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप 2 अप्रैल को पुख्ता तौर पर किन-किन देशों को टैरिफ की जद में ला सकते हैं। हालांकि, अमेरिका के वाणिज्य मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपने एक बयान में ‘डर्टी 15’ का जिक्र किया। उन्होंने बयान में साफ किया था कि 2 अप्रैल से अमेरिका के 15 फीसदी व्यापारिक साझेदार, जो हम पर जबरदस्त टैरिफ लगाते हैं और अमेरिकी उत्पादों के लिए व्यापार से जुड़ी बाधाएं पैदा करते हैं, वह सबसे पहले निशाने पर होंगे।

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय का 2024 का डाटा देखा जाए तो सामने आता है कि अमेरिका को व्यापार घाटा कुछ देशों से सबसे ज्यादा है। इनमें सबसे ऊपर चीन है। बताया जाता है कि इन देशों का अमेरिका के साथ सबसे ज्यादा व्यापार असंतुलन है और ऐसे में ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ की जद में यह देश शामिल हो सकते हैं। दूसरी तरफ अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधिन कार्यालय (यूएसटीआर) ने भी 21 देशों की पहचान की है, जिनके व्यापार असंतुलन की समीक्षा की जा रही है। ट्रंप के इस बार होने वाले टैरिफ की जद में ‘डर्टी 15’ देशों के आने की चर्चा सबसे ज्यादा है, हालांकि उनके बयानों पर ध्यान दिया जाए तो आयात शुल्क से प्रभावित होने वाले देशों की संख्या और ज्यादा हो सकती है।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER