शशी कुमार केसवानी

 

नमस्कार दोस्तों आइए आज बात करते है एक ऐसी सामाजिक फिल्म की जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि हमारा समाज आखिर किस दिशा में जा रहा है। जी हां दोस्तो मैं बात कर रहा हूं आज रिलीज होने वाली फिल्म अस्सी की जिसका दो दिन पहले स्पेशल स्क्रीनिंग इंदौर की सिने स्क्वॉयर सिनेमाज में रखा गया था। मेरे मित्र फिल्म डायरेक्टर अनुभव सिन्हा के आमंत्रण पर इंदौर गया था और फिल्म देखकर जो महसूस किया उसे शायद शब्दों में बयान नहीं कर पाऊंगा। खासतौर से देश में होने वाले रेप केस जिसका जिक्र इस पिक्चर में राोज अस्सी रेप के ऊपर किया गया है। हालांकि गांव कस्बों में होने वाले रेप पर कोई चर्चा नहीं होती और न ही उसपर कोई कानूनी कार्रवाई होती है। इस तरह से दुष्कर्म गन्ने के खेतों में ही नहीं गांव के खुले इलाकों में भी हो जाते है और कोई शब्द भी कहने वाला नहीं रहता। मैं अनुभव सिन्हा की प्रशंसा करता हूं कि वो सामाजिक मुद्दों पर कुछ न कुछ करते रहते है। अच्छी बात यह है कि वो पढऩे लिखने वाले व्यक्ति है और वो फिल्मों से जुड़े होने के कारण हकीकत स्वीकार नहीं करते है। वहीं तापसी की बात करूं तो वो इस तरह के रोल करने में पूर्ण रूप से सक्षम है। एक विशेष बातचीत में मुझसे कहा कि इस तरह के रोल अगर मैं नहीं करूंगी तो कौन करेगा। बहुत सी अभिनेत्रियां अलग अलग रोल करना चाहती है पर मुझे हकीकत के करीब और सामाजिक मुद्दो पर फिल्में करना ज्यादा पसंद है। अनुभव को मस्ती के अंदाज में हमने पूछा कि आपको सामाजिक मुद्दों का कीड़ा क्यों काटता है। ऐसे ही कई सवाल थे जिनके जवाब उन्होंने बहुत सधे हुए शब्दों में दिए जो आपके लिए प्रस्तुत है।

 

फिल्म ‘अस्सी’ समाज का कड़वा सच दिखाती है

फिल्म अस्सी में जब ये लाइन गुंजती है कि देश में अस्सी रेप केस रोज होते है तो फिल्म मनोरंजन से निकलकर अदालत की चौखट पर खड़ी दिखती है। ये कोई हल्की फुल्की कहानी नहीं या आंकड़ों की ठंडी सच्चाई को उजागर करती तो जलती हुई मशाल की तरह हो जाती है। तापसी पन्नू यहां सवाल ही नहीं करती उनकी आंखो में गुस्सा है पर शोर नहीं मचाता। अंदर ही अंदर रिसता रहता है। जैसे कोई सच बहुत देर से दबा हुआ है और लावे की तरह बोल पड़ा हो। फिल्म केवल अपराध ही नहीं दिखाएगी बल्कि समाज के ऊपर करारी चोट भी करेगी। कैमरा कोर्ट निजी जिंदगी के अंदर सबकुछ एक साथ घूम रहा हो और सवाल पूछ रहा हो क्या समाज जागेगा? फिल्म का संगीत भारी है पर नाटकीय नहीं है। सन्नाटा कई जगह संगीत से ज्यादा बोलता है। ये आपको कई जगह असहज कर देगा। सीट पर आराम से बैठने नहीं देगा। इन सभी सवालों को लेकर हमने अनुभव सिन्हा से खास बातचीत की।
अनुभव सिन्हा काफी लंबे समय से सफर कर रहे है। स्पेशल स्क्रीनिंग के बाद बहुत थके हुए थे पर देर रात को वादे के अनुसार वो बात करने के लिए तैयार हो गए। दिमाग में सवाल तो अनेकोनेक थे पर कुछ सवाल जिनके जवाब चाहिए थे वो इस तरह थे।
सवाल : फिल्म ये संदेश दे रही है कि समाज जिस तरह से भटकाव के रास्ते पर जा रहा है उसक नतीजा क्या होगा फिल्म में इतने सवाल है कि आदमी को बैचेन कर देता है।
जवाब : बिजी हो गए है हम ज्यादा। रेप के समाचार रोज अखबारों में छप रहे है तो हम सोचते है कई हजार किलोमीटर दूर कुछ हुआ है। अब हमें पढ़ के भी दुख नहीं होता है। जिसको हम जानते नहीं इससे बेहतर है इस तरह के समाचार न ही पढ़े तो बेहतर है। ईमानदारी से कहे तो हम नजर फेर लेते है। मुंह फेरने से कोई समस्या हल नहीं होती। और ऐसा भी नहीं कि ये समस्या हल नहीं करनी पड़ेगी। पोस्टर पर एक लाईन लिखी हुई है कि उस रात वो घर नहीं पहुंचीं। हर घर में ऐसा होता है कि बेटी बहू देर रात को घर पहुंचती है। मोबाइल साइलेंट पर करके भूल जाती है। लेकिन परिवार परेशान हो जाता है। और दूनिया भर के ख्याल दिमाग में आने लगते है। अक्सर कुछ नहीं होता बस साइलेंट करके भूल जाते है लेकिन परिवार बैचेन हो जाता है। लेकिन किसी के यहां कुछ हो भी रहा है। इस बारे में कुछ न कुछ है हर व्यक्ति के हाथ में कुछ ताकत तो है।
सवाल : आपको क्या लगता है ज्यूडिशियरी और पुलिस अपना ठीक से काम कर रही है? मैं भी ज्यूडिशियरी और पुलिस से जानकारी लेता रहता हूं। कई जज मुझे कहते है कि इसके लिए तो सख्त कदम उठाने ही पड़ेंगे।
जवाब : सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि ज्यूडिशियरी ओवरलोडेड है। उनके पास पहले से ही इतने पेंडिंग केस है और रेप केस सुलझाना कोई आसान काम नहीं है। इतनी परेशानियां है जिसकी हद नहीं। लेकिन कोर्ट का मानना ये रहता है कि चाहे दोषी छूट जाए पर निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। फिर भी ज्यूडिशियरी और पुलिस अपना काम कर ही रही है। लडक़ी की शादी होनी चाहिए थी फिर प्रेम होना चाहिए था फिर शादी के बाद उसे जो करना है करे पर जिसने बलात्कार किया वो कहां से आया। वो हमारे समाज में कहीं से निकल कर आया जो हमारे लिए दुखद है।
सवाल : जब मैं ये पिक्चर देख रहा था तो मन के अंदर बड़ी बैचेनी थी कई सवाल थे क्या इस पिक्चर से कुछ बदलाव आएगा?
जवाब : नहीं सर। पिक्चर से कोई बदलाव नहीं आता न कविता से कल्चर से प्रिटिंग से बदलाव नहीं होता है। बहुत से बहुत बातचीत का जरिया शुरू होता है। मैंने कहा अनुभव जी आपकी ये अच्छी बात है कि आप हकीकत को स्वीकार करते है और सहीं पक्ष रखते है। हमारी शुभकामनाएं।

फिल्म आपको सामाजिक समस्याओं पर बैचेन करती है

हमसे एक विशेष बातचीत में तापसी पन्नू ने बताया कि कुछ चीजे ही निर्देशक ही तय करते है। जो मेरे हिस्से की चीज है मैं बता देती हूं। लेकिन तापसी खूब मस्ती के मूड में थी। अनुभव से कहती है कि आपको सवाल समझ में आया उस दौरान अनुभव मेरा विडियो बना रहे थे। जिससे पूरा हाल ठहाकों में गूंज उठा। तब मैंने कहा कि मैंने अनुभव जी के साथ काफी समय गुजारा है वो मुझे अच्छी तरह जानते है और मुझे भी पता है उनके जवाब क्या होंगे। बहरहाल कुछ सवाल आप ही से करूंगा ।
सवाल : जब मैं ये पिक्चर देख रहा था तो कुर्सी पर ठीक से बैठ नहीं पा रहा था। कई सवाल मुझे बहुत बैचेन कर रहे है और मुझे ही नहीं हाल में बैठे सभी लोगों की यही हालत थी। बीच में जो चुप्पी आती है वो ये सवाल खड़ी कर रही थी और आपके चेहरे के भाव और बैचेन कर रहे थे।
जवाब : ये डायरेक्टर और एडिटर के टूल रहते है कि वो किसी तरह से किस चीज को इस्तेमाल करते है। इस सवाल का जवाब मेरे से ज्यादा अनुभव सर दे सकते है।
सवाल : आपने इस रोल के लिए किस तरह से तैयारी की थी। और उस समय किस तरह का महसूस कर रही थी।
जवाब : मैंने दिल्ली के एक कोर्ट में जाकर देखा कि इस तरह के केस किस तरह लड़े जाते है और किस तरह से कार्रवाई की जाती है उन सभी की मैंने जाकर स्टडी की थी। साथ में अनुभव सर के साथ इतनी फिल्में कर ली है कि अब वो डायरेक्टर न होकर एक अच्छे दोस्त हो गए है। जिससे उनके साथ काम करने में आसानी हो गई है।
सवाल कई थे पर तापसी की हालत देखते हुए हमने ये निर्णय लिया कि बातचीत को यही समाप्त किया जाए। अब उनसे कोई सवाल न किया जाए।

चुप्पी में सौ सवाल छुपे थे


इंदौर का एक नन्हा सा कलाकार अद्विक जयसवाल जिसकी उम्र 9 साल है अपने अभिनय में चुप्पी साधकर फिल्म में जो सवाल खड़े किए ऐसा लग रहा था इस चुप्पी के पीछे कई हजार सवाल छुपे है। शायद ऐसा बड़े कलाकार भी नहीं कर पाते अब तक चार फिल्मों में काम कर चुका नन्हा सा बच्चा इतना मनमोहित था कि हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। साथ ही साथ अपने माता पिता के दिए संस्कारों का जो परिचय दे रहा था उससे पता चल रहा था कि एक दिन ये बड़ा कलाकार बनेगा। फिल्म में अद्विक का रोल यादगार रहेगा।

 

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER