TIO नई दिल्ली

संसद के शीतकालीन सत्र का शुक्रवार को पांचवां दिन है। गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद के मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों ने दिल्ली के एयर पॉल्यूशन के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था। कई विपक्षी सांसद गैस मास्क पहनकर पहुंचे थे। सांसदों ने एयर पॉल्यूशन के मुद्दे पर सदन में चर्चा की मांग की।

वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के भारत दौरे को लेकर लोकसभा में विपक्ष के राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल किया। उन्होंने कहा- केंद्र सरकार नहीं चाहती है कि विपक्ष बाहर से आने वाले लोगों से मिले। मोदी जी और विदेश मंत्रालय इस नियम का पालन नहीं करते हैं। यह उनकी इनसिक्योरिटी है।

बीते दिन राज्यसभा में सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 बिल पास हुआ। इसके आने से तंबाकू और तंबाकू से बने प्रोडक्टस (सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, जर्दा इत्यादि) पर ज्यादा एक्साइज ड्यूटी लगेगी। लोकसभा से यह बिल बुधवार को ही पास हो गया था।

शीतकालीन सत्र में 10 नए बिल पेश होंगे

संसद के शीतकालीन सत्र में 10 नए बिल पेश होंगे। लोकसभा बुलेटिन में शनिवार (22 नवंबर) को इसकी जानकारी दी गई थी। इनमें सबसे अहम एटॉमिक एनर्जी बिल है, जिसके तहत पहली बार निजी कंपनियों (भारतीय और विदेशी) को न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

फिलहाल देश में सभी परमाणु संयंत्र सरकार के नियंत्रण वाली कंपनियां जैसे NPCIL ही बनाती और चलाती हैं। बिल पास होने पर निजी क्षेत्र को भी न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन में प्रवेश मिलेगा।

सत्र में आने वाला दूसरा बड़ा बिल ‘हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया’ बिल होगा। इसमें UGC, AICTE और NCTE जैसे अलग-अलग रेगुलेटरी संस्थानों को खत्म करके एक ही राष्ट्रीय कमीशन बनाने की योजना है। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सुगम और प्रभावी होगी।

अहम बिल जो पेश होंगे, उनसे क्या बदलाव

  • न्यूक्लियर सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव: लोकसभा बुलेटिन के अनुसार एटॉमिक एनर्जी बिल भारत में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल, कंट्रोल एंड रेगुलेशन से जुड़े प्रावधानों को नया फ्रेमवर्क देगा। यह पहली बार होगा जब प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर क्षेत्र में एंट्री मिल सकेगी। अब प्राइवेट कंपनियां भी न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगा सकेंगी।
  • हॉयर एजुकेशन कमीशन बनाने वाला बिल भी तैयार: सरकार हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल भी पेश करेगी। इसका उद्देश्य कॉलेज और यूनिवर्सिटी को अधिक फ्रीडम देना और सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। (UGC, AICTE, NCTE) को खत्म कर उन्हें एक ही कमीशन में जोड़ दिया जाएगा।
  • हाईवे भूमि अधिग्रहण तेज होगा: नेशनल हाईवे (संशोधन) बिल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बनाएगा, ताकि नेशनल हाईवे प्रोजक्ट्स में देरी कम हो सके।
  • कंपनी कानून और LLP कानून में बदलाव: सरकार कॉर्पोरेट लॉ (संशोधन) बिल, 2025 लाने की तैयारी कर रही है। जो कंपनी अधिनियम 2013 और LLP अधिनियम 2008 में बदलाव कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और सरल करेगा।
  • सभी बाजार कानून एक बिल में: सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल, 2025 का उद्देश्य सेबी एक्ट, डिपॉजिटरीज एक्ट और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट को मिलाकर एक सरल कानून तैयार करना है।
  • संविधान में संशोधन से जुड़ा बिल: संविधान में 131वां संशोधन करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस बिल के तहत खासकर चंडीगढ़ यूनियन टेरेटरी को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाया जाएगा। आर्टिकल 240 के तहत केंद्र सरकार केंद्रशासित प्रदेशों के लिए रेगुलेशन बना सकती है, जिन्हें कानून का दर्जा प्राप्त होता है।
  • कंपनियों के खिलाफ विवाद का जल्द निपटारा: कंपनियों और व्यक्तियों के बीच झगड़े अक्सर सालों कोर्ट में लटकते रहते हैं। ऑर्बिट्रेशन एंड कॉन्सीलिएशन (अमेंडमेंट) बिल, 2025 का उद्देश्य है कि मध्यस्थता फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया सरल हो और झगड़ों का समाधान तेजी से हो सके।

जस्टिस वर्मा महाभियोग के तहत हटाए जा सकते हैं

स्पीकर ने जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का ऐलान किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के 1-1 जज और 1 कानूनविद शामिल हैं। शीतकालीन सत्र में जांच समिति की अपनी रिपोर्ट रखेगी। अगर जस्टिस वर्मा पर आरोप साबित होते हैं तो संसद में वोटिंग के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश होगा।

प्रस्ताव के समर्थन में अगर दो तिहाई वोट पड़ेंगे तो प्रस्ताव पास हो जाएगा और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए जाएगा। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि जांच समिति की रिपोर्ट में आरोप तय हुए तो जस्टिस वर्मा खुद इस्तीफा दे सकते हैं।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER