TIO श्रीहरिकोटा

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सैटेलाइट सुबह 10.18 बजे लॉन्च हुआ था। - Dainik Bhaskar
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सैटेलाइट सुबह 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल का पहला सैटेलाइट मिशन फेल हो गया है। यह सोमवार सुबह 10:18 मिनट पर आंध्र प्रदेश के हरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV-C62 रॉकेट अन्वेषा समेत 15 सैटेलाइट लेकर उड़ा था।

इसरो के मुताबिक, मिशन के तीसरे स्टेज में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण सैटेलाइट अपने तय ऑर्बिट में तैनात नहीं हो सका और रास्ता भटक गया। ISRO प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके बाद वह रास्ता भटक गया।

8 महीने पहले, मई 18 2025 को इसरो का PSLV-C61 मिशन भी तकनीकी खराबी के कारण तीसरे स्टेज में फेल हो गया था। इस मिशन में EOS-09 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को 524 किमी की सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था। इसरो का यह 101वां लॉन्च मिशन था।

अन्वेषा जंगल-बंकरों में छिपे दुश्मनों को ढूंढ सकता है

अन्वेषा सहित 15 सैटेलाइट्स को आज सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV)-C62 के जरिए लॉन्च किया गया था। अन्वेषा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है।

यह उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस एक स्पाई (खुफिया) सैटेलाइट है, जिसका मकसद सटीक निगरानी और मैपिंग करना है। यह धरती से कई सौ किलोमीटर ऊपर होने के बावजूद झाड़ी, जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें खींच सकता है।

अन्वेषा सैटेलाइट उन्नत इमेजिंग क्षमता के लिए बनाया गया है, जो दुश्मन की गतिविधियों और ठिकानों की सटीक पहचान और मैपिंग में भारत की मदद करेगा।
अन्वेषा सैटेलाइट उन्नत इमेजिंग क्षमता के लिए बनाया गया है, जो दुश्मन की गतिविधियों और ठिकानों की सटीक पहचान और मैपिंग में भारत की मदद करेगा।

15 सैटेलाइट्स में 7 भारतीय और 8 विदेशी

EOS-N1 मिशन इसरो के साल 2026 का पहला सैटेलाइट मिशन लॉन्च है। इस मिशन को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने ऑपरेट किया है। NSIL, ISRO की कॉमर्शियल इकाई है।

जिन 15 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया गया है, उनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट हैं।

हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस ने इस लॉन्च के जरिए अपने 7 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे हैं। अन्य 8 विदेशी सैटेलाइट्स में फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के सैटेलाइट शामिल हैं।

यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट बनाने और उसके लॉन्च के लिए किया जा रहा 9वां कॉमर्शियल मिशन है। यह भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी की है।

HRS तकनीक पर काम करता है अन्वेषा सैटेलाइट

अन्वेषा सैटेलाइट, ‘हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग’ यानी HRS तकनीक पर काम करता है, जो रोशनी के ज्यादा स्पेक्ट्रम को डिटेक्ट करता है। यानी ये कुछ ही रंगों के बजाय रोशनी के सैकड़ों बारीक रंग पकड़ सकता है।

ये सैटेलाइट जो बारीक कलर डिटेक्ट करता है, उससे यह पता चल जाता है कि तस्वीर असल में किस चीज की है। यह एक ऐसे स्कैनर की तरह है, जो अलग-अलग तरह की मिट्टी, पौधे, इंसानी एक्टिविटी या किसी भी चीज को उसकी अलग चमक से पहचान सकता है।

डिफेंस सेक्टर के लिए फायदेमंद…

  • सैटेलाइट का इस्तेमाल जंगल, माइनिंग की निगरानी, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को मापने जैसे कामों में होता है। असल में ये सेनाओं के लिए एक सीक्रेट वेपन की तरह काम करता है।
  • सेना का टैंक किसी इलाके से गुजर सकता है या नहीं, ये जानने के लिए HRS के जरिए उस इलाके की मिट्टी का टाइप डिटेक्ट किया जा सकता है। अगर कहीं रेगिस्तानी या चिपचिपी मिट्टी है, तो यह पहले से बता देगा।
  • अक्सर जंगली इलाकों में पेड़-पौधे के पीछे छिपना आसान होता है। किसी झाड़ी में दुश्मन सेना का कोई जवान या नदी के पानी के नीचे कोई हथियार छिपा है, तो HRS तकनीक इसका पता लगा सकती है।
  • 3D इमेज के जरिए जंग के दौरान HRS के डेटा और तस्वीरों का इस्तेमाल करके सिमुलेशन बनाए जा सकते हैं। सेना के लिए सही रूट्स, दुश्मन सेना का फॉर्मेशन समझा जा सकता है। सीमाई इलाकों में दुश्मन की मूवमेंट पर नजर रखी जा सकती है।

यह PSLV की 64वीं उड़ान

PSLV दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में गिना जाता है। इसी रॉकेट से चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं। यह PSLV रॉकेट की कुल 64वीं उड़ान भी है।

PSLV अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है। PSLV का पिछला मिशन PSLV-C61 था, जिसमें 18 मई 2025 को EOS-09 सैटेलाइट लॉन्च किया गया था। हालांकि तीसरे स्टेज में आई तकनीकी समस्या के कारण वह मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो सका।

अब तक 6 देश HySIS सैटेलाइट लॉन्च कर चुके

भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान, इटली और पाकिस्तान भी हाइपरस्पेक्ट्रल लॉन्च कर चुके हैं। भारत ने इससे पहले 29 नवंबर 2018 को अपनी पहली हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च की थी।

HySIS नाम के इस सैटेलाइट का वजन 380 किलो था। हालांकि ये 55 स्पेक्ट्रल बैंड्स में रोशनी को डिटेक्ट कर सकता था। अन्वेषा, HySIS का अपग्रेडेड वर्जन है और इसकी हाइपरस्पेक्ट्रल क्षमता भी ज्यादा है।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER