शशी कुमार केसवानी
राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता है जो भी होता है उसकी पटकथा काफी पहले से लिखी जा रही होती है। सरकार के भविष्य की कई योजनाएं छिपी होती हैं। अब उप राष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफे ने भी कई सियासी बहस को छेड़ दिया है हालाकि इसके पीछे की योजना क्या थी ये हम भी नहीं कह सकते मगर जो भी होगा उससे भविष्य की सियासी दशा और दिशा तय होगी। जिसकी तस्वीर जल्द साफ होगी।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की संभावित 6 वजहें जो मेरी नजर में अभी तक आ रही है। दिल्ली में कुछ राजनीतिक मित्रों से बात हुई तो उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज को भी राजनीति से अलग करके किसी ऐसे पद पर लाने की कोशिश हो रही है जिनसे उनका बढ़ता हुआ कद उसपर लगाम लगाई जा सके। यह चर्चा बहुत पहले से दबी जुबान में चल रही थी। लेकिन भागवत जी के 75 बरस वाले बयान ने रायता ऐसा फैलाया है जो अब पार्टी से सम्भाले नहीं सम्भल रहा।
1- संघ प्रमुख मोहन भागवत का 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट का फरमान। धनखड़ कुछ ही दिनों में 75 के होने वाले हैं।
2 धनखड़ इस इस्तीफे से प्रधानमंत्री मोदी को भी घर वापसी का संदेश देना चाहते थे।
3- आज सदन की कार्रवाई के दौरान जिस ढंग से वह विपक्षी सांसदों और नेता प्रतिपक्ष खरगे से प्रेम पूर्ण ढंग से बोल रहे थे यह बात भाजपा को नागवार गुजरी है।
4- यह राजनाथ को उपराष्ट्रपति और योगी को रक्षा मंत्री बनाने की कवायद हो सकती है।
5 – धनखड़ को अब घुटन महसूस हो रही थी।
6-आज बिज़नेस एडवायजरी कमेटी की बैठक में समूचा विपक्ष धनखड़ के साथ था। इस बैठक में जे पी नड्डा और रिजिजू नामौजूद थे। यह बात उन्हें नागवार लगी।
गुलदस्ता दिया जा रहा है या लिया जा रहा है.. बिल्कुल इसी तरह लोगो को समझ नहीं आया कि इस्तीफ़ा दिया गया या लिया गया
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन जहां लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी नेताओं का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला वहीं देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम भी देखने को मिला। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार, 21 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उपराष्ट्रपति ने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों को इसके पीछे की वजह बताई है। हालाकि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय पर आया है, जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ है और सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में है। उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, और उनके इस्तीफे के बाद सदन का संचालन प्रभावित हो सकता था। हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस स्थिति के लिए एक व्यवस्था पहले से तय है।
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद से सियासी गलियारों में कई प्रकार का अंदेशा भी जताया जा रहा है। कोई इसे बिहार के चुनाव से जोड़कर देख रहा है कि एक मुख्यमंत्री को केंद्र की राजनीति में लाया जाएगा और एक केंद्रीय मंत्री को उपराष्ट्रपति की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
धनखड़ के वीडियो हो रहे वायरल
धनखड़ के इस्तीफे के साथ ही उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उनको ये कहते हुए सुना जा सकता है कि वो किसी के भी दबाव में काम नहीं करते हैं और न ही भविष्य में कभी किसी के दबाव में काम करेंगे।
विपक्ष लगातार लगाता रहा आरोप
राष्ट्रपति धनखड़ को लेकर विपक्ष ने किस प्रकार की टिप्पणियां की थीं वो किसी से छिपी नहीं है। एक बार विपक्ष के नेता खुद राहुल गांधी संसद परिसर में उनकी मिमिक्री करते हुए कैमरे में कैद हुए थे। तो वहीं विपक्ष उन पर लगातार सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाता रहा है।
खैर ये राजनीति है यहां हर किसी पर किचड़ उछाला जाता है… आरोप लगाए जाते हैं मगर कई बार आरोप सही भी साबित होते हैं तो कई बार उनका हकिकत से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है। मगर फिलहाल उनके इस्तीफे की बात किसी को भी हजम नहीं हो रही है। हर किसी को यही लग रहा है कि सब कुछ पहले से तय था जो वजह बताई गई वो भी योजना का हिस्सा मानी जा रही है।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद कहा ये भी जा रहा है कि भाजपा के पास कई वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े चेहरे हैं, जिन्हें इस पद के लिए चुना जा सकता है। संभावित उम्मीदवारों में कुछ वर्तमान राज्यपालों, संगठन के अनुभवी नेताओं और यहां तक कि केंद्रीय मंत्रियों के नामों पर चर्चा हो रही है।







