शशी कुमार केसवानी संपादक
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश और दुनिया में नारी शक्ति को सलाम किया जा रहा है। अपने जज्बे व उत्कृष्ट कार्यों से समाज और देश में अलग स्थान पाने वाली महिलाओं की उपलब्धियां से आपको रूबरू करा रहे है। जिन्होंने अपने नाम के साथ-साथ अपने परिवार का ही नहीं बल्कि देश का भी नाम ऊंचा किया है।
नमस्कार !
* अपने क्षेत्र में खास उपलब्धियां हासिल करने वाली कुछ महिलाओं का उदाहरण देकर हम महिलाओं की उन्नती को दर्शाते है। पर अगर आप ध्यान दे तो कुछ अदभुत करने वाली महिलाएं तो हर काल में रही है। सीता से लेकर द्रौपदी, रजिया सुल्तान से लेकर दुर्गावति, लक्ष्मीबाई से लेकर इंदिरा गांधी और देश के सबसे उच्च पद पर आसीन महामहिम द्रौपदी मुर्मू। परन्तु महिलाओं की स्थिति में कितना परिवर्तन आया और आम महिलाओं ने परिवर्तन को किस तरह से देखा?
सोच में परिवर्तन : दरअसल असल परिवर्तन तो आना चाहिए आम लोगों के जीवन में। जरुरत है उनकी सोच में परिवर्तन लाने की। उन्हें बदलने की। आम महिलाओ के जीवन में परिवर्तन, उनकी स्थिति में, उनकी सोच में परिवर्तन। यही तो है असली सशक्तिकरण
आर्थिक : उन्हें बचपन से सिखाया जाता है की खाना बनाना जरुरी है। आर्थिक रूप से सक्षम होना भी जरुरी है। जरुरत है की सिखाया जाये की कमाना भी जरुरी है। परिवार के लिये नहीं वरन अपने लिए। पैसे से खुशियाँ नहीं आती, पर पैसे से बहुत कुछ आता है जो साथ खुशियां भी लाता है। उन्हें सब आता है। वे सब करती है। उनके इसी हुनर को घर के बाहर लाना है।
गुजरात : एक ऐसा राज्य है जहां से काफी पुरूष काम काज के सिलसिले में विदेश चले जाते हैं। मजबुरन औरतों को घर से बाहर कदम निकालना पड़ता है, कभी बच्चों के लिये तो कभी घर के दैनिक काम-काज के लिये। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास और स्वाभिमान बढ़ने लगता है। ऐसा कई दशकों से चल रहा है। फलत: आज गुजराती औरतों में आत्मविशवास, और स्वाभिमान कूट-कूट कर भरा है। इसके कई उदाहरण मुझे अपने अनगिनत गुजरात प्रवासों के दौरान देखने को मिले।
विपरीत परिस्थितियों का डटकर किया मुकाबला : हर विपरीत परस्थितियों से लेकर कोरोना महामारी के दौरान तक महिलाओं ने जिस तरह से उम्मीद से बढ़कर कार्य किया। उसके लिए उन्हें सैल्यूट किया जाना चाहिए। जिस तरह से नर्सों ने या महिला डॉक्टरों ने जान की परवाह न करते हुए अनेक लोगों की जान बचाई है तथा निस्वार्थ भावना से यह सेवा की है। उन्हें सदियों तक याद रखा जाएगा। घरों में भी जिस तरह काम का बोझ था बीमारी की विपरीत परिस्थितियों में अपने मोर्चे पर डटी रही। ऐसी महिलाओं को देश सलाम करता है।
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Anupama Joshi (Uttarakhand)
DEFENCE SERVICE

Wing Commander Anupama Joshi (Retd.) is a trailblazer who joined the Indian Air Force in 1993 as part of the first batch of women officers. Serving at major air bases, she excelled as an instructor at the Fighter Training Wing and Navigation Training School, earning commendation from the Chief of Air Staff for her dedication. A champion of gender equality, she led a seven-year legal battle in the Delhi High Court, resulting in women receiving permanent commission in the armed forces. Beyond service, she has held leadership roles in development, education, and financial inclusion, empowering rural communities and inspiring future leaders.
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प्रियंका चतुर्वेदी, राज्यसभा सदस्य, मुंबई

पुरुष प्रधान समाज में अगर महिला सवाल करती है तो लोगों की नजरें उस पर टिक जाती हैं। पर यह महिला देशहित, जनहित में हमेशा सवाल करती नजर आती हैं। राज्यसभा में हर समय हर समस्या पर सवाल करना सवाल से पहले की तैयारी करना अपने आप में एक बड़ा काम है। प्रियंका चतुर्वेदी एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने महिलाओं के लिए हमेशा उनके हक की लड़ाई लड़ती आ रही हैं। देश दुनिया में महिलाओं की मिसाल बनीं प्रियंका राज्यसभा के साथ साथ कई पदों पर रहीं हैं पर हर पद की मर्यादा के अनुसार उन्होंने जो सराहनीय कार्य किए हैं वे अपने आप में मिसाल हैं। हमारा सैल्यूट
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डॉ.कीर्ति काले कवियित्री, नई दिल्ली

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं सभी महिलाओं से यही कहना चाहूँगी कि प्रकृति ने नारी को नर से अधिक सहनशील, सृजनशील और मजबूत बनाया है।अब तो विज्ञान ने भी यह साबित कर दिया है। इसलिए अपनी स्वाभाविक शक्ति को पहचानिए।पुरुषों की होड़ करने की बजाय प्रकृति प्रदत्त अपने गुणों को विकसित कीजिए और खुश रहिए। ईश्वर ने आपको अधिक दिया है और आप कम होना चाहती हैं। स्त्री सशक्तिकरण को लेकर हमने गलत दिशा चुन ली है। स्त्री को पुरुषों की बराबरी करना छोड़ देना चाहिए क्योंकि दोनों न कभी बराबर थे,न हैं,न ही कभी होंगे। अपने स्त्री होने पर गर्व कीजिए। अपने बच्चों को स्त्री का सम्मान करना सिखाईए।
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आईपीएस सांवला प्रसाद, मध्यप्रदेश

सिमाला प्रसाद देश की उन आईपीएस अफसरों में नाम आता है जिन्होंने फिल्मी दुनिया को छोडक़र देशसेवा के लिए आईपीएस किया। एसपी बैतूल और जबलपुर रहते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए अनेको कार्य किए। उन्होंने हमें एक बातचीत में बताया कि उनका उद्देश्य है हर बेटी का सपना सुरक्षित हो, हर स्त्री का सम्मान सुनिश्चित हो यही महिला दिवस का सच्चा संदेश है। ऐसी अफसर को हमारा सैल्यूट।
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आर जे कृति इंदौर

रेडियो की दुनिया में अपने नाइट बैंड शो से लोगों का दिल जीतने वाले मशहूर आर जे कृति ने अब एक नई राह चुनी है। चकाचौंध को पीछे छोड़, उन्होंने खुद को योग और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। अब वे एक प्रतिष्ठित एनजीओ के साथ जुडक़र शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे ज़मीनी मुद्दों पर काम कर रही हैं। रेडियो स्टूडियो से योग मैट तक का यह सफर केवल करियर का बदलाव नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का एक संकल्प है। कृति का कहना है कि माइक पर आवाज़ उठाने से बेहतर है कि किसी के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जाए। और महिला सशक्तिकरण के लिए हमेशा कार्य करने वाली आर जे कृति को सैल्यूट करते हैं।
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IAS श्रीमती अनु गर्ग
मुख्य सचिव, ओडिशा

ओडिशा की वर्तमान मुख्य सचिव श्रीमती अनु गर्ग हैं, जिन्होंने 1 जनवरी 2026 को कार्यभार ग्रहण किया। वह ओडिशा की पहली महिला मुख्य सचिव हैं। अपने काम से प्रदेश में सबके हक के लिए काम करने वाली इस महिला को प्रदेश के आईएएस और आईपीएस या अन्य अधिकारी सम्मान की निगाह से देखते है। ऐसी ही महिलाओं पर इस देश को फक्र है। हमारा सैल्यूट।
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IAS नंदिनी चक्रवर्ती
मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल

1994 बैच की आइएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। प्रदेश की पहली मुख्य सचिव बनी है। पर उनके लिए विपरीत परिस्थितियों में काम करना अपने आप में एक अलग चैलेंज है। पर हमारी नजर में केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही है। वैसे भी वो जनप्रिय अधिकारी है और प्रदेश भर में उनके काम की चर्चा रहती है हमारा सैल्यूट।
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तापसी पन्नू, फिल्म अभिनेत्री, मुंबई

तापसी पन्नू महिला सशक्तिकरण की मुखर समर्थक हैं, जो पितृसत्ता को चुनौती देने, शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता, और आत्मरक्षा पर जोर देती हैं। वह मानती हैं कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए निडर होकर आवाज़ उठानी चाहिए और समाज में पितृसत्तात्मक सोच को बदलना आवश्यक है। यही कारण है महिला प्रधान पिक्चर्स करने वाली तापसी ने हाल ही में फिल्म अस्सी में ये साबित किया है कि महिला चाहे तो किसी भी गलत चीज का विरोध करके दिखा सकती है और अपनी ताकत दिखाने पर आ जाए तो कानून के जरिए समाज को एक सबक सिखा सकती है। ऐसी अभिनेत्री को हमारा सैल्यूट।
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आईएएस संस्कृति जैन कमिश्नर बीएससी भोपाल

संस्कृति जैन मध्यप्रदेश कैडर की २०१५ बैच की आईएएस है। उन्होंने २०१४ में यूपीएससी में ११ वीं रैंक हासिल की। पूर्व में रीवा नगर निगम कमिश्नर, अलीराजपुर में जिला पंचायत की सीईओ और सिवनी कलेक्टर के बाद भोपाल नगर निगम कमिश्नर के तौर पर सफलता के पंचम फैला रही है। बहुत ही सरल स्वभाव की मालकिन संस्कृति जैन महिला सशक्तिकरण के लिए अपने आप में एक अलग ही मिसाल है। जिन्होंने ये साबित किया है कि अपने कार्य के दम पर ही किसी महिला को समाज में अलग पहचान मिलती है। ऐसी महिला को हमारा सैल्यूट।
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श्रीमती डॉली मिश्रा,
पिपरी चिंचवड़ विश्वविद्यालय दिल्ली प्रमुख

शिक्षा महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधारशिला है। लड़कियों की शिक्षा समाज के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वयं पर विश्वास रखे अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखे। अपने सपनों को उड़ान दें और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें। जीवन में अपने स्वयं के मानक स्थापित करें। और दूसरों के लिए प्रेरणा का उदाहरण बनें। ऐसा कहना है श्रीमती डॉली मिश्रा पिपरी चिंचवड़ विश्वविद्यालय दिल्ली की प्रमुख का जो शिक्षा जगत में अनेको संस्थाओं में अपने व्याख्यान से बच्चों को प्रेरित करती है और देश में बच्चों को शिक्षा के लिए नई ऊंचाईयों पर ले जाती है। खासतौर से लड़कियों के लिए उल्लेखनीय कार्य करती है ऐसी महिला को हमारा सैल्यूट।
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मेघना मलिक
फिल्म अभिनेत्री, मुंबई

फिल्म अभिनेत्री मेघना मलिक ने एक बातचीत में हमें बताया कि समाज में महिलाओं के प्रति बदलाव आया है पर ये बदलाव सीमित जगह पर ही है। बहुत सी जगहों पर अभी भी महिलाओं को अपने अधिकार छीन कर लेने पड़ते है। वा एक मजबूरी है कोई भी नंबर वन की जगह छोडऩा नहीं चाहता । यही कारण रहता है कि महिलाओं का संघर्ष बढ़ जाता है। हालात ये है कि आदमी भी दूसरे आदमी को अपनी जगह नहीं देना चाहता तो महिलाओं को कैसे दे देगा। पर मेरा मानना है जिसका जो अधिकार हो उसे उसका स्थान मिलना चाहिए और महिलाओं को अपनी हक की लड़ाई लडऩा चाहिए। ऐसी अभिनेत्री को हमारा सैल्यूट।
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