– शशी कुमार केसवानी
डॉ श्रीधर सुंदरम एक सरल व्यक्तित्व के धनी है। टाटा हास्पिटल में आने वाले मरीजों की जांच बहुत बारीकी से करते है और बीमारी की जड़ को पकडऩे में अपने आप में महारत रखते है। देशभर से आने वाले मरीजों से सरलतापूर्वक व्यवहार के लिए उनकी एक अलग ही पहचान है। कोई भी व्यक्ति उनसे पूरी जानकारी लेकर अपने जीवन को सरल तरीके से कैंसर से लड़ सकता है। हौसला अफजाई करने में तो उनकी महारत है। ऐसे डॉक्टरों को हमेशा सैल्यूट किया जाना चाहिए। तो आइए उनकी कुछ जानकारियां आपसे शेयर करते है। डॉ. श्रीधर सुंदरम मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल (ञ्जरू॥) में कार्यरत एक प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं। वे एडवांस्ड इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी के विशेषज्ञ हैं और वर्तमान में वहाँ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्य कर रहे हैं। उनका मुख्य कार्य कैंसर से जुड़ी पाचन तंत्र की जाँच और उपचार पर केंद्रित है।
शैक्षणिक और व्यावसायिक अनुभव : डॉ. सुंदरम ने वर्ष 2020 में चयन प्रक्रिया के बाद टाटा मेमोरियल अस्पताल में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएँ शुरू कीं। इससे पहले वे मुंबई के ्यश्वरू अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग में सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुके हैं।
उन्हें श्वक्रष्टक्क, श्वस् और एंडोस्कोपिक रिसेक्शन जैसी उन्नत तकनीकों में विशेष अनुभव है, जो कैंसर की पहचान और इलाज में बहुत उपयोगी हैं।
उपलब्धियाँ और योगदान : डॉ. श्रीधर सुंदरम के पास रूष्ठ, ष्ठरू और स्नढ्ढस्त्र जैसी उच्च चिकित्सा योग्यताएँ हैं। वे एक सक्रिय इंटरवेंशनल एंडोस्कोपिस्ट हैं। इसके साथ ही वे इंडियन जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी के मैनेजिंग एडिटर भी हैं। उनका शोध कार्य गूगल स्कॉलर पर उपलब्ध है, जिसमें पैंक्रियाज़ से संबंधित इंसुलिनोमा के इलाज पर किए गए अध्ययन शामिल हैं।







