TIO नई दिल्ली

राहुल गांधी शुक्रवार को जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल छात्र साहिल को साथ लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचे। उन्होंने पैलेट गन मामले में पीड़ित की FIR दर्ज करने की मांग की, लेकिन FIR नहीं होने पर वे थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रियंका गांधी भी राहुल के साथ धरने पर बैठीं।
राहुल ने संसद के मानसून सत्र में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च में पैलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे को उठाया था और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा था। हालांकि, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि पुलिस ने गोली नहीं चलाई है।
नीट पेपर लीक के खिलाफ CJP का 20 जून से जंतर-मंतर प्रदर्शन शुरू हुआ था। सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की थी। 20 जुलाई के संसद मार्च में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई थी। 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ।
घटना से जुड़ी 6 तस्वीरें…





पहले 2 बार शिकायत करने आए थे साहिल
14 अगस्त को साहिल लोचव वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस के पास पहुंचे और लिखित शिकायत दी। आरोप है कि पुलिस ने I/O नंबर देने से इनकार कर दिया।
17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी शिकायत की जानकारी दी गई, लेकिन न I/O नंबर मिला और न ही शिकायत की रसीद दी गई।
29 जुलाई: राहुल ने संसद में कहा था- गृहमंत्री ने छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया
राहुल ने संसद में अपनी स्पीच में आरोप लगाया था कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृहमंत्री ने गोली और पैलेट गन चलाने की अनुमति दी। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इसे गंभीर और निराधार आरोप बताते हुए राहुल से माफी की मांग की। राहुल ने ये भी कहा, ‘मैंने कई छात्रों से बातचीत की। खासकर लवली नाम की एक 18 साल की छात्रा से। राहुल ने उसी बातचीत का हवाला देते हुए ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ वाले उदाहरण दिए। सत्ता पक्ष ने इसे असंसदीय बताया। स्पीकर ओम बिड़ला ने इन शब्दों को कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया।
दिल्ली पुलिस बोली- पीड़ित की शिकायत क्राइम ब्रांच को भेजी जाएगी
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने कहा- DCP सचिन शर्मा राहुल गांधी के संपर्क में हैं। शिकायत पीड़ित ने दर्ज कराई थी। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच 20 जुलाई को दर्ज सभी मामलों की जांच पहले से ही कर रही है। शिकायतकर्ता को बताया गया है कि उसकी शिकायत भी क्राइम ब्रांच को भेजी जाएगी।
राहुल के साथ पीड़ित छात्र और उसकी मां भी धरने पर बैठीं
भास्कर नॉलेजः भारत में पैलेट गन को लेकर क्या नियम हैं?
भारत में पैलेट गन पूरी तरह बैन नहीं है। इसके इस्तेमाल के लिए गृह मंत्रालय (MHA) के दिशा-निर्देशों के तहत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाई गई है।
सरकार के मुताबिक, पैलेट गन कम घातक हथियार है। इसका इस्तेमाल हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आखिरी विकल्प के तौर पर किया जा सकता है।
गृह मंत्रालय ने कहा कि पैलेट गन का इस्तेमाल सिर्फ उतना ही किया जाए, जितना हालात को काबू में करने के लिए जरूरी हो। कार्रवाई के दौरान आम लोगों और सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए।
इसके लिए जवानों को खास प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि हथियार का इस्तेमाल नियमों के अनुसार और कम से कम नुकसान के साथ हो।
घायल छात्र साहिल की रोशनी लौटने की सिर्फ 1% संभावना


राहुल ने जिस छात्र की चोट दिखाई। उसका नाम साहिल लोचाब है। वह 19 साल का है और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का रहने वाला है। 20 जुलाई को जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस की पैलेट गन से इनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई थी। AIIMS के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी हुई है।
परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने बताया है कि घायल आंख की रोशनी लौटने की सिर्फ 1% संभावना है, क्योंकि आंख की पुतली को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) के छात्र हैं। उनकी मां ज्योति ने बताया, ‘वह पहले भी CJP के प्रदर्शन में गया था। सोमवार को भी यह कहकर गया कि यह उसके लिए जरूरी है और उसकी पढ़ाई से जुड़ा मुद्दा है। वह हमेशा पुलिस अधिकारी बनना चाहता था।’







