TIO नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर टैक्स और निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की है। हालांकि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि पेट्रोल-डीजल के रिटेल दामों में फिलहाल कोई कमी नहीं की गई है। सरकार का यह कदम ऊर्जा क्षेत्र में टैक्स ढांचे को सरल और तार्किक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार ये नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। हालांकि इस कटौती के बावजूद आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के दामों में किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी। इसकी मुख्य वजह यह है कि तेल विपणन कंपनियां इस कटौती से होने वाले लाभ का उपयोग अपने नुकसान की भरपाई करने में करेंगी। पिछले समय में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण इन कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में अब लागत कम होने से उनके मुनाफे और कैश फ्लो में सुधार होगा। सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क नियम, 2017 में भी संशोधन किया है। इसके तहत पेट्रोल, हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) और एटीएफ पर नियम 18 और 19 के प्रावधान लागू नहीं होंगे। हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को ईंधन निर्यात करने पर पहले की तरह छूट मिलती रहेगी।
निर्यात के मोर्चे पर भी सरकार ने अहम बदलाव किए हैं। हाई-स्पीड डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 18.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर इस शुल्क को शून्य रखा गया है। इससे पेट्रोल निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा निर्यात और विदेशी एयरलाइंस को ईंधन आपूर्ति के मामलों में बुनियादी उत्पाद शुल्क और कृषि उपकर को हटाने का फैसला किया गया है। एविएशन सेक्टर के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। एटीएफ पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर किया गया था, लेकिन एक अलग अधिसूचना के जरिए प्रभावी दर को घटाकर 29.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। साथ ही, आयातित एटीएफ पर अतिरिक्त सीमा शुल्क को भी हटा दिया गया है, जिससे एयरलाइंस की लागत कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इन फैसलों से ऊर्जा क्षेत्र में टैक्स ढांचे में स्पष्टता आएगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, इसका अंतिम असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल, यह कदम तेल कंपनियों के लिए राहत भरा साबित होगा, जबकि आम जनता को सस्ते ईंधन के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER