शशीकुमार केसवानी
जमीनी हकीकत

किसी भी राज्य का मुख्य सचिव सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी पद रहता है। इस पद के पीछे वरिष्ठता के साथ-साथ उनकी छवि केंद्र और राज्य से संबंध भी बड़ी वेल्यू रखते है। सरकार अपनी उम्मीदों पर उसी तरह से उतारना चाहती है जैसा वे चाहती है। मुख्य सचिव का चयन मुख्यमंत्री द्वारा वरिष्ठतम आईएएस अधिकारियों में से किया जाता है और उनका कार्यकाल निश्चित नहीं होता है। हालांकि, प्रशासनिक सुधार आयोग ने सिफारिश की थी कि मुख्य सचिव का कार्यकाल 3-4 वर्ष का होना चाहिए, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया है। कई बार कुछ मुख्य सचिव ऐसे कुछ काम कर जाते हैं जिससे सरकार की छवि आम लोगों में लोकप्रिय हो जाती है। बस फिर क्या है उस मुख्य सचिव को सरकार किसी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती। पर आजकल केंद्र सरकार भी अपनी नीतियों को राज्यों में उसी तरीके से लागू कराना चाहती है जिस तरह से वे चाहती है। यही कारण है मुख्य सचिव को दो नावों पर सवार रहना पड़ता है। मुश्किल तो तब होती है जब अलग-अलग सरकारें हो पर डबल इंजन सरकार में तो एक ही नीति रहती है। इसलिए काम करने की सहूलियत रहती है। लंबे समय से देखने को मिल रहा है देश भर मेेंं कई राज्यों के प्रमख सचिवों को एक्सटेंशन मिल रहा है। लेकिन, प्रशासनिक व्यवस्था के तहत मुख्य सचिव को भी एक न एक दिन रिटयर्ड होना पड़ता है। इसके बावजूद सरकार को लगता है कि उनके साथ काम करते रहे। फिर उन्हें किसी बोर्ड का अध्यक्ष भी बना दिया जाता है। पिछले कुछ समय में कुछ राज्यों में मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिले पर कुछ बदले भी गए। अभी भी कई राज्यों में एक्सटेंशन पर चल रहे है कुछ राज्यों में नए मुख्य सचिव बनाए गए है। सरकार की ये नीति किसी के भी समझ में नहीं आती आखिर इतने एक्सटेंशन क्यों दिए जाते है। राज्यों में तो ठीक है केंद्र में भी अनगिनत अधिकारी को एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन मिलता जा रहा है। पीछे कतार में खड़े अधिकारी इंतजार में ही है। आईएएस होने के बावजूद भी अपनी शीर्ष पर न पहुंचने का कई अधिकारी को अफसोस रहता है। मेरे ऐसे कई अधिकारी दोस्त है जिनके दिल में मुख्य सचिव न बनने का अफसोस आज भी किसी न किसी रूप में बता ही देते है।

अब अनुराग जैन मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश


अनुराग जैन ने 03 अक्टूबर 2024 में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव का पदभार संभाला है। वे 1989 बैच के प्रदेश के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। 31 अगस्त, 2025 को वे सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उन्हें एक साल का एक्सटेंशन दिया गया है। मुख्य सचिव बनने से पहले अनुराग जैन प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में सडक़ एवं परिवहन मंत्रालय में सचिव रहे। वित्तीय मामलों में गहरी पकड़ रखने वाले अनुराग जैन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सचिव भी रह चुके हैं। भोपाल कलेक्टर रहते जमीनों के मामलों में खासी समझ रखने वाले अनुराग जैन ने मर्जर एग्रीमेंट मामले और शत्रु संपत्ति पर खासा काम किया। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान वे प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव भी रहे। साफ-सुथरी छवि व प्रशासनिक पकड़ की वजह से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की गुड बुक में है।

इकबाल सिंह बैस, पूर्व मख्य सचिव, मध्य प्रदेश

सरकार इतनी मेहरबान थी कि उन्हें 6 माह का एक्सटेंशन तीन बार दिया गया। लेकिन केंद्र की बेरूखी से चौथा एक्सटेंशन नहीं मिल पाया। इसी दौरान कई मध्यप्रदेश के आईएएस अफसर के सपनों पर पानी फिर गया था। बहुत मुश्किल से वीरा राणा को मुख्य सचिव बनने का अवसर मिला पर पूरा समय यही चलता रहा आज जा रही है और कल जा रही है। जो किसी भी अधिकारी के लिए पद पर रहने से ज्यादा सर पर तलवार लटकना अजीब ही स्थिती रहती है। इसी दौरान आचार संहिता लागू होने के कारण वीरा राणा, मोहम्मद सुलेमान और विनोद कुमार के नाम का पैनल में था चुनाव आयोग को भेजा गया था। बाकी की कहानी तो सबको पता ही है। राजनीति का शिकार कौन बना था।

अब राजेश अग्रवाल मुख्य सचिव, महाराष्ट्र


महाराष्ट्र के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश अग्रवाल वर्तमान में महाराष्ट्र के मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 1 दिसंबर 2025 को राजेश कुमार मीणा के सेवानिवृत्त होने के बाद यह सर्वोच्च प्रशासनिक पद संभाला है। वे एक अनुभवी अधिकारी हैं और डिजिटल गवर्नेंस तथा तकनीकी नवाचारों में विशेषज्ञता रखते हैं। साथ ही साथ मुख्यमंत्री के काफी करीबी व्यक्तियों में माने जाते है। प्रशासनिक निर्णय भी लेने में सक्षम है। 1 दिसंबर 2025 से नवंबर 2026 तक रहने की उम्मीद है। आगे भी उनको एक्सटेंशन मिलने के आसार है।

राजेश कुमार मीणा पूर्व मुख्य सचिव, महाराष्ट्र


1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश कुमार मीणा 1 जुलाई, 2025 को महाराष्ट्र के नए मुख्य सचिव चुने हैं। वे 31 अगस्त, 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। केंद्र सरकार ने उन्हें तीन महीने वा एक्सटेशन दिया है। मीणा शुरू से पडऩे में बहुत होशियार और तेजतर्रार अफसरों में गिने जाते है। वर्ष 1988 में पहले ही प्रवास में यूपीएससी में सिलेक्ट हो गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण स्थानों पर अपने काम का लोहा मनवाया है। राजनीतिक तौर पर भी केंद्र व राज्य सरकारों से गोटिया ठीक जगह पर बिठाने में मास्टर है। अफसरों में भी अलग छवि बना रखी र्है। जबकि आसानी से काम नहीं करते। पर नए मुख्यमंत्री के आते ही कुछ समय बाद ही उनकी सेवाएं समाप्त की गई और सरकार ने अपने विश्वसनीय व्यक्ति को लाया गया।

अब श्रीमती अनु गर्ग , मुख्य सचिव, ओडिशा


ओडिशा की वर्तमान मुख्य सचिव श्रीमती अनु गर्ग (ढ्ढ्रस्) हैं, जिन्होंने 1 जनवरी 2026 को कार्यभार ग्रहण किया। वह ओडिशा की पहली महिला मुख्य सचिव हैं, जिन्होंने वरिष्ठ ढ्ढ्रस् मनोज आहूजा से यह पदभार ग्रहण किया है। वे 1991 बैच की ओडिशा कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। अपने कई साथियों को पीछे छोड़ते हुए इस पद पर पहुंची। सरकार के साथ तालमेल बिठाने में काफी तेज तर्रार है। ऐसे ही अफसरों को एक्सटेंशन के अवसर मिलते ही है।

मनोज आहूजा पूर्व मुख्य सचिव, ओडिशा

मनोज आहूजा को 1 जुलाई, 2024 से ओडिशा का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वे 1990 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। आहूजा को 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर होना था, उन्हें एक साल का एक्सटेंशन दिया गया है। हरियाणा के मूल निवासी आहूजा 2017 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर में पर थे और राज्य सरकार के अनुरोध पर उन्हें मूल कैडर में वापस भेजा गया था। आहूजा दो दशकों में ओडिशा के बाहर के पहले व्यक्ति हैं, जी राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद पर पहुंचे हैं। आहुजा ने राज्य सरकार के साथ अपनी सेवा के दौरान वाणिज्यिक कर आयुक्त, सहकारिता, इस्पात एवं खान, खेल एवं युवा मामले, खाद्य आपूर्ति एवं ऐसी रही है छवी – हरियाणा में पैदा हुए मनोज आहुजा अपने स्वच्छ छवि एवं सालीनता के लिए परिचित हैं।

अनुराग रस्तोगी मुख्य सचिव, हरियाणा


अनुराग रस्तोगी ने 20 फरवरी, 2025 को हरियाणा के मुख्य सचिव का पद संभाला था। उन्हें 30 जून, 2025 को रिटायर होना था। सरकार ने रस्तोगी को एक साल का एक्सटेंशन दिया है। 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। मुख्य सचिव पद के पहले वे वित्त आयुक्त, राजस्व और अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त एवं योजना) भी रह चुके हैं। 31 अक्टूबर, 2024 को टीवीएसएन प्रसाद के सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्हें तीन दिन के लिए मुख्य सचिव का कार्य सौंपा गया था, क्योंकि मुख्य सचिव नियुक्त किए गए विवेक जोशी उस वक्त केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। फरवरी में रस्तोगी ने विवेक जोशी का स्थान लिया, जिन्होंने चुनाव आयुक्त नियुक्त होने पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। इन्हें 1 साल का एक्सेटेंशन दिया गया है।
इन दो अफसरों का बढ़ा इंतजार : मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को एक साल का एक्सटेंशन मिलने के बावजूद 1990 बैच में उनसे सीनियर दो आईएएस अधिकारियों सुधीर राजपाल और डॉ. सुमिता मिश्रा का हरियाणा का मुख्य सचिव बनने का इंतजार और लंबा हो गया है। क्योंकि राजपाल की आईएएस की रिटायरमेंट 30 नवंबर 2026 जबकि डॉ. मिश्रा की 31 जनवरी 2027 को निर्धारित है। अनुराग रस्तोगी को एक्सटेंशन मिलने के बाद अब वह जून 2026 तक हरियाणा के मुख्य सचिव पद का कार्यभार देखेंगे।

अब नंदिनी चक्रवर्ती मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल


1994 बैच की आइएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वह निवर्तमान मुख्य सचिव मनोज पंत का स्थान लिया। नंदिनी चक्रवर्ती बंगाल के प्रशासनिक इतिहास में मुख्य सचिव का पद संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। और मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी की काफी करीबी मानी जाती है। केंद्र सरकार इनके पक्ष में न होने के बावजूद भी उन्हें इस पद पर ममता ने पदस्थ करवाया। काफी तेज तर्रार नंदिनी अपने कार्य कराने में हमेशा सक्षम रहती है।

डॉ. मनोज पंत पूर्व मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल


उत्तराखंड के रहने वाले आईएएस अधिकारी डॉ. मनोज पंत को 1 सितंबर, 2024 को पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव बनाया गया। उन्हें 30 जून, 2025 में सेवानिवृत्त होना था। डॉ. पंत को छह महीने का एक्सटेंशन दिया गया है। ये 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। मुख्य सचिव बनने से पहले वे पश्चिम बंगाल में सिंचाई और जलमार्ग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में सेवा दी है। पंत केंद्र में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. प्रणव मुखर्जी के निजी सचिव रहे। वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में भी उन्होंने काम किया, जहां उन्होंने बांग्लादेश, भूटान, भारत और श्रीलंका में मामलों की देखरेख की। डॉ. प्रणब मुखर्जी के निजी सचिव भी रहे ।

के रामकृष्ण राव मुख्य सचिव, तेलंगाना


के रामकृष्ण राव को 30 अप्रैल, 2025 को तेलंगाना का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। ये 30 अगस्त, 2025 को रिटायर होने वाले थे, उन्हें सरकार ने सात महीने का एक्सटेंशन दिया है। राव तेलंगाना कैडर के 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनके नाम 14 राज्य बजट तैयार करने का रिकॉर्ड है। 2016 से वित्त विभाग से जुड़े रहे। उन्होंने 10 साल के बीआरएस शासन और वर्तमान सरकार के तहत विभिन्न योजनाओं के लिए धन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 1991 में सिविल सेवा में शामिल हुए और अविभाजित आंध्र प्रदेश में आदिलाबाद और गुंटूर जिलों के कलेक्टर के रूप में कार्य किया। राव अपनी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान 2003 से 2016 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव भी रहे। के. रामकृष्ण राव तेलंगाना के वर्तमान मुख्य सचिव हैं। उन्हें अप्रैल 2025 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति से पहले, वे वित्त विभाग में विशेष मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने मई 2025 में मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण किया था।

अब मुख्य सचिव के रूप में श्री विकास शील, छत्तीसगढ़


भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1994 बैच के अधिकारी हैं। उन्होंने 30 सितम्बर 2025 को छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। वे लंबे समय से प्रशासनिक सेवा में रहते हुए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। केंद्र सरकार में अपनी अच्छी पैठ की वजह से अपनी जगह बना पाए।

अमिताभ जैन पूर्व मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़


अमिताभ जैन को 30 नवंबर, 2020 को छत्तीसगढ़ का 12वां मुख्य सचिव बनाया गया था। वे 30 जून 2025 को रिटायर होने ही वाले थे, लेकिन उससे पहले उन्हें तीन महीने का एक्सटेंशन दिया गया है। वे 1989 बैच के आईएएस अधिकारी है। अमिताभ जैन रायपुर और बिलासपुर जिले के कलेक्टर रहे। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार की सहमति से 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी अमिताभ जैन का राज्य के मुख्य सचिव के रूप में कार्यकाल बढ़ा दिया गया था। जैन, जो 30 जून, 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले थे, अब 30 सितंबर, 2025 तक इस शीर्ष नौकरशाही पद पर कार्यरत रहे। छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से 2000 में राज्य के इतिहास में यह पहला विस्तार है, जिससे किसी मुख्य सचिव को आधिकारिक विस्तार मिलने का यह पहला मामला बन गया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस अप्रत्याशित फैसले ने उन लोगों को चौंका दिया, जो शीर्ष स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि 30 सिंतबर को रिटायर्ड हो गए है। पर कोशिश उनकी थी कि एक और एक्सटेंशन मिल जाए। इस तरह के फैसलों से जो बाद की कतार में जो अफसर खड़े रहते है उनका कहीं न कहीं अधिकार मारा ही जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर अपने पसंदीदा अफसरों पर हमेशा मेहरबानी बरसाते है इस चक्कर में काबिल अफसर हमेशा पीछे रह जाते है।

अब मुख्य सचिव पद पर संजय गुप्ता, हिमाचल प्रदेश

अब हिमाचल प्रदेश में मुख्य सचिव पद पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता की नियुक्ति कर दी गई है। 1988 बैच के आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता ने सत्ता संभालते ही भारी फेरबदल भी कर दिया। इंतजार के बाद मिलने वाला पद बदलाव के रास्ते पर ही जाता है। अब आगे देखते है कि इन्हें कितने एक्सटेेंशन मिलते है!

प्रबोध सक्सेना पूर्व मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश

प्रबोध सक्सेना ने 31 दिसंबर, 2022 को हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण किया। वे 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे 31 मार्च, 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन सरकार ने उन्हें छह महीने का एक्सटेंशन दिया है। उन्होंन राज्य सरकार, केंद्र सरकार और बहुपक्षीय संस्थानों में कई वरिष्ठ और महत्वपूर्ण पर्दे पर कार्य किया है। सक्सेना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि में स्नातक और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से विधि में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में उनके कई प्रकाशन हैं। उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में नियमित रूप से व्याख्यान देने का अवसर भी मिलता है। सक्सेना ने दुनिया के सभी महाद्वीपों के 75 से अधिक देशों की व्यापक याज की है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्त होने के बाद १ अक्टूबर को मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को राज्य विद्युत बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। आईएएस अधिकारी सक्सेना ने बिना देर किए पदभार ग्रहण किया। वर्तमान में विद्युत बोर्ड अध्यक्ष संजय गुप्ता अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER