फिल्म समीक्षा : शशी कुमार केसवानी

वरुण धवन, जान्हवी कपूर, रोहित सराफ और सान्या मल्होत्रा जैसी स्टार कास्ट से सजी फिल्म ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। शशांक खेतान की फिल्म ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ देखने के बाद ऐसा लगता है जैसे स्क्रीन पर सब चमक रहा है, लेकिन दिल कहीं पीछे छूट गया है। शादी-ब्याह के रंग-बिरंगे सेट, गाने और फैशन तो आपको पहली नजर में लुभाते हैं, सनी वरुण धवन के इर्द-गिर्द बुनी गई है। सनी अपनी प्रेमिका अनन्या सान्या मल्होत्रा को पूरी ताकत से चाहता है, लेकिन सरप्राइज। उसका प्रोपोजल रिजेक्ट हो जाता है। वहीं तुलसी जान्हवी कपूर भी अपने प्रेमी विक्रम रोहित सराफ से रिजेक्ट हो जाती है। अब अनन्या और विक्रम एक दूसरे से शादी करने जा रहे हैं। ऐसे में खोए हुए प्यार को वापस पाने के लिए सनी और तुलसी मिलकर एक प्लान बनाते है। नकली प्यार की प्लानिंग, ताकि प्री-वेडिंग में अपने पुराने प्रेमियों को जला सकें। मतलब… झूठा रोमांस, नकली इमोशन और बीच-बीच में हंसी के हल्के-फुल्के पल। लेकिन जैसे ही सनी और तुलसी की एक-दूसरे के प्रति असली भावनाएं उभरती हैं, उनका प्लान उलझ जाता है। वरुण धवन ने अपनी एनर्जी और चार्म से सनी को जिंदा किया है, और मेहनत करके रोल में जान फूंकी है। जान्हवी कपूर सुंदर और उत्साही हैं, लेकिन बार-बार वही एक्सप्रेशन देखकर लगता है- ‘कहीं रिवाइंड तो नहीं हो गया?’ अनन्या के किरदार में सान्या मल्होत्रा आकर्षक हैं, जबकि विक्रम के रोल में रोहित सराफ संतुलित और समझदार लगते हैं। रोहन सराफ की जगह कोई और होता तो ज्यादा बेहतर होता। मनीष पॉल का हास्य और वेडिंग प्लानर के रूप में अच्छा रोल निभाया है। अपनी हेल्थ हाइट और अभिनय का पुरजोर इस्तेमाल किया है। हास्य कभी-कभी हिट, लेकिन कई जगह रिपीट भी लगता है। अक्षय ओबेरॉय समेत बाकी सहायक कलाकार रंग भरते हैं, लेकिन ज्यादातर कलाकार सिर्फ बैकग्राउंड में ही रह जाते हैं। निर्देशन : शशांक खेतान ने फिल्म के सेट और लुक पर जोर दिया है। शादी-ब्याह के सीन सुंदर हैं, लेकिन कहानी में नया ट्विस्ट नहीं है। कई जगह ये फिल्म उनकी पिछली फिल्मों हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया और बद्रीनाथ की दुल्हनिया जैसी ही लगती है। पेस धीमी है और कई सीन खींचे हुए हैं। ये फिल्म २ घंटे में कम्पलीट होती तो ज्यादा बेहतर होती। सिनेप्लेक्स लंबा नजर आता है। फिल्म का संगीत तनिष्क बागची, ए.पी.एस, सचेत-परंपरा, गुरु रंधावा, रॉनी अजनाली और गिल मच्छरै ने मिलकर दिया है। प्रमुख गाने ‘बिजुरिया’और ‘पनवाड़ी’ कुछ हद तक यादगार हैं, लेकिन ये गाना आखिरी में होने के कारण बड़ा कमाल नहीं कर पाएगा लेकिन बाकी गाने कहानी में फिट होने के बावजूद ज्यादा असर नहीं छोड़ पाते।
पटकथा और स्क्रीनप्ले
कहानी में कोई नई सोच नहीं है। नकली रोमांस, गलतफहमियां और भावुक सुलह अनुमानित लगती हैं। इससे पहले भी ऐसी कई फिल्में देख चुके हैं। हास्य दृश्य कभी-कभी मनोरंजन करते हैं, लेकिन अधिकांश सीन दोहराव वाले और खिंचे हुए हैं। स्क्रीनप्ले भी कुछ खास नया नहीं पेश करता। दृश्य और घटनाओं का क्रम साधारण है, जिससे फिल्म में रोमांच या ट्विस्ट कम दिखाई देते हैं।
पॉजिटिव और नेगेटिव
फिल्म में एक तरफ हल्का रोमांस है। कुछ मजेदार पल हैं। वरुण-जान्हवी की मजेदार जोड़ी है और रंग-बिरंगे शादी और ब्याह के सीन भी हैं। वहीं दूसरी तरफ पुरानी कहानी, सपाट पात्र और खींची हुई पटकथा भी है। गाने भी ज्यादा यादगार नहीं हैं।
देखें या नहीं
अगर आप सिर्फ हल्का फुल्का रोमांस, शादी की चमक और थोड़े बहुत हंसी के पल चाहते हैं, तो एक बार के लिए देखी जा सकती है। लेकिन अगर आप नई कहानी, गहरे पात्र और रोमांचक मोड़ चाहते हैं, तो यह फिल्म ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी।
मेरा सोचना है फिल्म में दो हीरो और दो हीरोइन ही काफी थे। फिल्म में जान्हवी के साथ सारा अली होती तो पिक्चर बड़ी भी हो जाती और मजेदार भी हो जाती अगर आप वरूण धवन और जान्हवी को पसंद करते है तो ये फिल्म जरूर देखना चाहिए। साफ-सुथरी फिल्म है परिवार के साथ देखी जा सकती है। ऐसी फिल्म बहुत दिनों बाद आई है जो परिवार के साथ सुकून से देखी जा सकती है।
कलाकार
वरुण धवन , जान्हवी कपूर , रोहित सराफ, सान्या मल्होत्रा , मनीष पॉल और अक्षय ओबेरॉय
लेखक
शशांक खेतान और इशिता मोइत्रा
निर्देशक
शशांक खेतान
निर्माता
करण जौहर , आपूर्वा मेहता , हीरू यश जौहर, शशांक खेतान और आदर पूनावाला
रिलीज : 2 अक्टूबर 2025
रेटिंग 3.5/5

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER