TIO नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जवाब तलब किया है. (File Photo)सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया के AI-171 विमान हादसे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस घटना को महज ‘पायलट की गलती’ करार देना दुर्भाग्यपूर्ण है. अदालत ने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर इस मामले में केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) से जवाब तलब किया है.
‘जांच रिपोर्ट आने से पहले ही छप गई खबर’
यह टिप्पणी तब आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें पायलटों को ही हादसे का दोषी ठहराया गया था. उन्होंने बताया कि सूत्रों के हवाले से छपी यह रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सरकार को सौंपे जाने से पहले ही प्रकाशित हो गई थी. भूषण ने कहा कि ‘पायलट की गलती’ की कहानी तेजी से फैल गई, जबकि पायलट बहुत ही अनुभवी थे.
260 लोगों की हुई थी मौत
सुप्रीम कोर्ट जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच इस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया क्रैश की कोर्ट-निगरानी वाली स्वतंत्र जांच की मांग की गई है. इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 19 लोग ज़मीन पर मौजूद थे.
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि 12 जून को हुए एयर इंडिया हादसे को 100 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अब तक सिर्फ प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ही जारी की गई है.
भूषण ने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को सार्वजनिक करने पर जोर देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार और पूर्व पायलटों को डर है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में लिखी गई एक पंक्ति, जिसमें पायलट एरर की ओर इशारा किया गया, को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जल्दबाजी में फैलाया. भूषण का कहना था कि इस मामले में गोपनीयता उचित नहीं है, क्योंकि पायलट और चालक दल के सभी सदस्य हादसे में जान गंवा चुके हैं.







