TIO शशी कुमार केसवानी
मुख्य सचिव अनुराग जैन का इसी माह रिटायरमेंट होना है 31 अगस्त को वैसे तो सेवानिवृत्ती का दिन है। 1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को पिछले वर्ष सितंबर में उस समय मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था, जब वे केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर थे। यहां और बता दूं उस समय आईएएस राजेश राजौरा को मुख्य सचिव लगभग नियुक्त कर दिया था। परंतु केंद्र के हस्तक्षेप के बाद अनुराग जैन को भोपाल भेजा गया। केंद्र में अपनी सेवाएं देते समय अनुराग जैन के संबंध पीएमओ में बड़े जबर्दस्त रहे हैं। उनकी नियुक्ति को केंद्र की प्राथमिकता माना गया था। यही वजह है कि अब उनके संभावित सेवा विस्तार को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। उन्हें सेवावृद्धि मिलेगी या नहीं, इस पर फैसला जल्द होगा। यदि सरकार उन्हें रोकने का निर्णय करती है तो फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से सेवावृद्धि का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजना होगा, जो अभी तक नहीं भेजा गया है। हमारे सूत्रों के अनुसार दिल्ली से 20 अगस्त के लगभग कहा जाएगा कि सेवानिवृत्ति के लिए पत्र भेंजे। दिल्ली में शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों से अनुराग जैन के अच्छे संबंध भी हैं और उनके विश्वसनीय भी हैं। मध्यप्रदेश में होने वाले निर्णयों में इनका हस्तक्षेप भी रहता है। साथ ही साथ यहां बताता चलूं कि हाल ही में केंद्र सरकार ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को सेवानिवृत्ति के दिन ही एक साल का सेवा विस्तार दिया, जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को तीन माह का विस्तार मिला। हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को सेवा विस्तार नहीं दिया गया। ऐसे में मध्यप्रदेश में मुख्य सचिव को लेकर कुछ लोंगो के दिलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पर दिल्ली में हमारे सूत्रों के अनुसार अनुराग जैन को ही सेवावृद्धि दी जाएगी। यदि दूसरे विकल्प पर विचार भी किया जाता है तो फिर सबसे वरिष्ठ अधिकारी अपर मुख्य सचिव जल संसाधन राजेश कुमार राजौरा को अवसर दिया जा सकता है। वह मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव भी रहे हैं और उज्जैन संभाग के प्रभारी हैं। वहीं, 1991 बैच के अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल भी कतार में है। जब अनुराग जैन को मुख्य सचिव बनाया गया था, तब राज्य में नई सरकार बनी ही थी और उन्हें मुख्यमंत्री की पसंद के बजाय केंद्र से आए निर्देश के आधार पर चुना गया था। अब जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगभग 20 माह से पद पर हैं और प्रशासनिक ढांचे से पूरी तरह परिचित हो चुके हैं, ऐसे में वे अपनी प्राथमिकता के अनुसार निर्णय ले सकते हैं। पिछले वर्षों में प्रदेश में कई मुख्य सचिवों को सेवा विस्तार मिल चुका है। इनमें आर परशुराम, बीपी सिंह, इकबाल सिंह बैन्स और वीरा राणा शामिल हैं। वीरा राणा की सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन ही केंद्र से निर्देश आने के बाद अनुराग जैन की नियुक्ति की गई थी। प्रदेश में मोहन यादव सरकार को 1988 बैच की वीरा राणा प्रभारी मुख्य सचिव के तौर पर मिली थीं। 31 मार्च 2024 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसके पहले आठ मार्च को सरकार ने उन्हें छह माह की सेवावृद्धि दिलाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था, जिसे स्वीकार करते हुए 30 सितंबर 2024 तक सेवावृद्धि मिल गई।
इसके बाद आईएएस संवर्ग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी 1989 बैच के अनुराग जैन को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लेकर मुख्य सचिव बनाया गया। उनके साथ-साथ अपर मुख्य सचिव राजेश कुमार राजौरा का नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम निर्णय जैन के पक्ष में हुआ। अब एक बार फिर मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई है। यदि अनुराग जैन को सेवा विस्तार नहीं मिलता है, तो नए मुख्य सचिव के रूप में डॉ. राजेश राजौरा, अलका उपाध्याय और अशोक बर्णवाल के नामों की चर्चा है। राजेश राजौरा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफल आयोजन के साथ 18 नई औद्योगिक नीतियां भी उनके समय में ही आईं। उन्हें छह माह की सेवावृद्धि मिलती है तो फरवरी 2026 तक ही वह काम कर सकेंगे। राजौरा मुख्यमंत्री के साथ काम कर चुके हैं और भरोसे के अधिकारी माने जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से विचारों का बदलाव देखा गया है।







