बात दिल की, शशी कुमार केसवानी
नमस्कार दोस्तो, आइए बात करते है एक ऐसे भारतीय सिनेमा जगत के ऐसे एक्टर निर्माता निर्देशक जिन्होंने हिन्दी सिनेमा को नए आयाम दिए। साथ ही साथ टेलीविजन को भी एक अलग स्थान दिला कर खड़ा कर दिया। जी हां दोस्तो मैं बात कर रहा हूं धीरज कुमार की जिन्होंने अपने लंबे करियर में कई लोकप्रिय शोज और फिल्मों में काम किया था। परंतु दुर्र्भाग्य यह रहा इस प्रतिभा को वह स्थान हासिल न हुआ जिसका वो हकदार था। आज लोगों को याद भी होगा रोटी और कपड़ा मकान फिल्म में जो इंस्पेक्टर बना था वह धीरज कुमार ही था। बड़े कलाकारों के सामने अक्सर छोटा करके पेश करना इंडस्ट्री की पुरानी परंपरा है। अनेकों ऐसी फिल्में है जिनकी चर्चा की जा सकती है। जो एक लंबी कथा है पर आज मैं उसपर कोई चर्चा नहीं करूंगा। आज तो सिर्फ धीरज कुमार के किए गए कामों पर ही बात दिल की करेंगे और उनके कुछ अनछूए पहलुओं पर भी चर्चा करेंगे।
धीरज कुमार का जन्म अविभाजित भारत में पंजाब के शहर लाहौर में 1 अक्टूबर 1944 को हुआ था। उनके पिता भगवानदास कोचर और माता लीलावती कोचर के घर हुआ था। पिता ने अपने बेटे का नाम पुरूषोत्तम रखा। बाद में वो नाम धीरज कुमार हो गया। १९४७ में विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली में आकर बस गया। साथ ही साथ आपको बताता चलूं कि धीरज कुमार बचपन में पोलियो के कारण उनके पैरों में कमजोरी थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने जोश और जुनून से अपने आपको ताकतवर बनाया।
पुरूषोत्तम ने दिल्ली में पढ़ाई के दौरान स्टेज पर अपनी कला का जौहर दिखाया। पहले साल की पढ़ाई के बाद इनका एडमिशन पूना फिल्म इंस्ट्ीट्य़ूट में हो गया १९६५ में फिल्मफेयर द्वारा आयोजित एक टैलेंट शो के फाइनलिस्ट में से एक थे। अन्य फाइनलिस्टों में सुभाष घई और राजेश खन्ना शामिल थे और राजेश खन्ना अंतत: विजेता बने। हालांकि उसके बाद छोटे-मोटे काम मिलते रहे पर इंडस्ट्री का संघर्ष बड़ा होता है। जिसके चलते उन्हें उस संघर्ष से गुजरना पड़ा। इसके बाद उन्हें फिल्मों में अपनी शुरुआत करने में मदद मिली, साथ ही उन्होंने विक्स एक्शन 500 सहित कई विज्ञापनों में मॉडलिंग भी की।

उन्होंने 1970 से 1984 तक 21 पंजाबी फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने क्रिएटिव आई नामक एक प्रोडक्शन कंपनी शुरू की और इसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रहे। फिल्म स्वामी (1977) में, का करूँ सजनी, आए ना बालम गीत उन पर फिल्माया गया था। उन्होंने हीरा पन्ना , रातों का राजा (जिसमें वे मुख्य भूमिका में थे), श्रीमान श्रीमती जैसी अन्य फिल्मों में भी काम किया । एक्टिंग से की थी शुरुआत, उन्होंने अपने लंबे करियर में कई लोकप्रिय शोज और फिल्मों में काम किया था। साल 1970 में उन्होंने बतौर एक्टर फिल्म दीदार से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया जिसमें रातों के राजा, ‘बहारों फूल बरसाओ’, ‘शराफत छोड़ दी मैंने’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘सर्गम’, ‘क्रांति’, ‘मान भरों सजना’ जैसी फिल्में शामिल हैं।
धीरज कुमार ने सेट पर बैन कर दी थी सिगरेट – धीरज कुमार के दूरदर्शन के लोक्रप्रिय शो ओम नम: शिवाय को लेकर बहुत सारे किस्से हैं जो फेमस हैं। ये शो साल 1997 से 2001 तक टेलिकास्ट हुआ था। धीरज कुमार ने एक बातचीत में बताया था कि वो और उनकी पत्नी इस शो के निर्माता थे। उन्होंने बताया था कि सेट पर सभी लोग भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और आदर दिखाने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करते थे। पूरे सेट पर सात्विक भोजन जरूरी था और धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित था।
उन्होंने ये भी बताया था कि जिस स्टूडियो में शो की शूटिंग होती थी, वहां भगवान शिव की एक प्रतिमा को स्थापित किया गया था। उस प्रतिमा को कभी हटाया या दूसरी जगह पर नहीं रखा गया था। हर दिन शूटिंग शुरू करने से पहले पूरी टीम उस मूर्ति के सामने पूजा करती थी और फिर दिन का काम शुरू होता था। धीरज कुमार की शादी , धीरज कुमार का पारिवारिक जीवन भी काफी स्थिर और सुखद रहा। उन्होंने जूबी से विवाह किया था। उनके दो संतानें हैं – बेटा सिद्धांत और बेटी सिमरन। धीरज कुमार ने 1996 में चर्चित पौराणिक धारावाहिक ‘ओम नम: शिवाय’ का निर्माण किया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि इस शो को बनाने के लिए उन्होंने करीब 9 वर्षों तक रिसर्च की थी। उन्होंने इसकी तैयारी 1987 में ही शुरू कर दी थी और कई बड़े लेखकों की मदद से इसकी स्क्रिप्ट को अंजाम दिया था। लखनऊ की संध्या रियाज मुंबई में उनकी प्रोडक्शन कंपनी में कई वर्षों से काम कर रही हैं।
बातचीत में उन्होंने बताया कि मेरे लिए मुंबई में वे बड़े भाई की तरह थे, जिन्होंने हर कदम पर साथ दिया। संध्या ने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक के बाद वर्ष 1985 में वह मुंबई आ गईं। फिल्म, संगीत, टीवी, रेडियो और पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने के बाद 2007 में उन्होंने धीरज कुमार की प्रोडक्शन कंपनी क्रिएटिव आई को जॉइन किया। उनके साथ कई प्रोजेक्टों में क्रिएटिव एंड डवलपमेंट हेड के रूप में काम किया। इस दौरान उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। संध्या ने कहा कि धीरज नेक दिल के इंसान थे। पूरी टीम को साथ लेकर चलते और सभी के सुझाव लेते थे। उन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में भी बहुत काम किया। निशुल्क कैंप लगवाए। संध्या ने कहा कि मेरा घर लखनऊ तो छूट चुका था, लेकिन मुंबई में उनकी सरपरस्ती में बेहद संवेदनशील अभिभावक मिला। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता। बताया कि हम लोग बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। अब उनके जाने से शायद उसे पूरा कर पाना मुश्किल होगा। 49 साल पहले रिलीज फिल्म शिरडी के साईं बाबा में धीरज कमार ने निभाया था खास किरदार – हिंदी सिनेमा के वेटरन एक्टर-डायरेक्टर धीरज कुमार का बीते दिन 80 साल की उम्र में निधन हो गया। 1970 में फिल्म दीदार से अपने करियर की शुरुआत करने वाले धीरज कुमार की सबसे फेवरेट फिल्मों में से एक शिरडी के साईं बाबा है। इस फिल्म का मनोज कुमार से क्या कनेक्शन है चलिए जानते हैं बीते दिनों बॉलीवुड के गलियारों से एक बेहद ही दुखद खबर सामने आई। 70-80 के दशक के मशहूर अभिनेता और डायरेक्टर धीरज कुमार का 80 साल की उम्र में निधन हो गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता काफी समय से बीमार थे, जिसकी वजह से उन्हें मुंबई में अंधेरी स्थित कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती किया गया था। दिग्गज अभिनेता धीरज कुमार ने मंगलवार को भले ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया हो, लेकिन वह अपने पीछे दर्शकों के लिए कई यादगार फिल्में छोड़ गए। रात का राजा से लेकर हिंदी सिनेमा को उन्होंने रोटी कपड़ा और मकान जैसी कई ऐसी फिल्में दी जिसे उनके फैंस जिंदगी भर चेरिश करेंगे। उनकी इन्हीं फिल्मों में से एक फिल्म 49 साल पहले आई शिरडी के साईं बाबा भी है। इस फिल्म में उनका किरदार बहुत लोकप्रिय हुआ था।
साईं बाबा के चमत्कार के किस्से भक्तों के बीच बहुत ही मशहूर है और उन्ही की सादगी से भरी कहानी को पर्दे पर साल 1977 में उतारा गया था। मूवी की कहानी एक बीमार बच्चे की होती है, जो शिरडी जाना चाहता है और साईं बाबा से एक बार मिलना चाहता है। यह फिल्म साईं बाबा के जन्म से लेकर उनके चमत्कार और उनके द्वारा दी गई शिक्षा पर बेस्ड है। 19वीं 20वीं सदी को दर्शाती मूवी में धीरज कुमार ने तात्या कोटे का किरदार निभाया था, जो साईं बाबा के बहुत ही बड़े भक्त थे और साथ ही उन्हें प्यार से मामा बुलाते थे। हालांकि, फिल्म में उनका किरदार बहुत लंबा नहीं था, लेकिन छोटे से स्क्रीन टाइम में अपना प्रभाव दर्शकों पर छोड़ा था। शिरडी के साईं बाबा की स्टारकास्ट की बात करें तो इस फिल्म में अभिनेता सुधीर दलवी ने शिरडी के साईं बाबा का किरदार अदा किया था। ये उनके करियर की सबसे बेस्ट फिल्म मानी जाती है। इसके अलावा मूवी में मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रेमनाथ, मदनपुरी, धीरज कुमार, कृष्ण धवन, मनमोहन कृष्णा जैसे अभिनेताओ ने अलग-अलग किरदार अदा किये थे। मनोज कुमार ने मूवी में सिर्फ भक्त और वैज्ञानिक का किरदार ही नहीं अदा किया था, बल्कि उन्होंने इस मूवी की कहानी भी लिखी थी। फिल्म के निर्देशन की कमान अशोक वी. भूषण ने निभाई थी।
क्या मनोज कुमार के रिश्तेदार थे धीरज कुमार? धीरज कुमार के निधन के बाद से ही सोशल मीडिया पर ये सवाल पूछा जा रहा है कि धीरज कुमार और दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार का आपस में क्या कनेक्शन था। आपको बता दें कि धीरज कुमार और भारत पुत्र का आपस में कोई खून का रिश्ता नहीं था, लेकिन रोटी कपड़ा और मकान एक्टर मनोज कुमार को अपने बड़े भाई की तरह मानते थे। धीरज कुमार ने खुद अपने एक इंटरव्यू में ये बताया था कि मनोज कुमार ने उनकी शादी के समय पर फाइनेंशियली उनकी काफी मदद की थी। जब मनोज कुमार का निधन हुआ था, तो धीरज कुमार काफी टूट गए थे। इंडस्ट्री के लिए बड़ा नुकसान – धीरज कुमार ने हिंदी सिनेमा और टेलीविजन दोनों में अपनी खास जगह बनाई थी। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी अपना अहम योगदान दिया। उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में अपनी पहचान बनाई, बल्कि टीवी सीरियल्स के माध्यम से भी घर-घर में लोकप्रियता हासिल की। साल 1981 की सुपरहिट फिल्म क्रांति में उनकी भूमिका आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा है। इसके अलावा, उन्होंने ‘ओम नम: शिवाय’, ‘श्री गणेश’ जैसे धार्मिक शोज को बनाकर भारतीय टेलीविजन को नई दिशा दी।
धीरज कुमार का फिल्मों में रहा बड़ा योगदान
फिल्मोग्राफी
द्य दीदार (1970)
द्य रातों का राजा (1971)
द्य बहारों फूल बरसाओ (1972)
द्य बिजली (1972)
द्य हीरा पन्ना (1973)
द्य शराफत छोड़ दी मैने (1973)
द्य रोटी कपड़ा और मकान (1975)
द्य रंगा खुश (1975)
द्य अंगारे (1976)
द्य दाज (1976)
द्य फौजी (1976) (पंजाबी फि़ल्म)
द्य उधार का सिंदूर (1976)
द्य शेर पुत्तर (1977) पंजाबी फिल्म
द्य स्वामी (1977)
द्य शिरडी के साईं बाबा (1977)
द्य सरगम (1979 फि़ल्म)
द्य सेहती मुराद (1979) (पंजाबी फिल्म)
द्य चोरन नू मोर (1980) (पंजाबी फिल्म)
द्य माँग भरो साजना (1980)
द्य क्रांति (1981)
द्य पाँचवीं मंजि़ल (1983)
द्य पुराना मंदिर (1984)
द्य बेपनाह (1985) शेषनाग के रूप में
द्य कर्म युद्ध (1985) कुंदन के रूप में
निर्देशक/निर्माता
द्य कहां गए वो लोग (1986) (निर्देशक)
द्य अदालत (1986)
द्य संसार (1993)
द्य ओम नम: शिवाय (1997)
द्य धूप छांव (1999)
द्य जाप टैप व्रत (2000)
द्य श्री गणेश (2000) चैनल: सोनी
द्य सच (2001)
द्य जाने अनजाने (2001)
द्य पाओवन (2004) चैनल: हंगामा टीवी
द्य क्या मुझसे दोस्ती करोगे (2004) चैनल: हंगामा टीवी
द्य अरे…यही तो हैई वो! (2004) चैनल: स्टार वन
द्य ओम नमो नारायण (2004) चैनल: सहारा वन
द्य बंधम
द्य रूबी डुबी हब डब (2005) चैनल: सहारा वन
द्य मिली (2006) चैनल: स्टार प्लस
द्य जोड़ी कमाल की (2006) चैनल: स्टार प्लस
द्य घर की लक्ष्मी बेटियां (2006) चैनल: ज़ी टीवी
द्य मन में है विश्वास (2006) चैनल: सोनी
द्य हमारी भाऊ तुलसी (2007) चैनल
द्य मायका (2007) चैनल: ज़ी टीवी
द्य वक़्त बताएगा कौन अपना कौन पराया (2008) चैनल: सोनी
द्य जय माँ वैष्णवदेवी (2008) चैनल: 9&
द्य गणेश लीला (2009) चैनल: सहारा वन
द्य ये प्यार ना होगा कम (2009) चैनल: कलर्स
द्य रिश्तों के भंवर में उलझी नियति (2011) चैनल: सहारा वन
द्य बाबोसा (2011) चैनल: सोनी
द्य सवारे सबके सपने प्रीतो (2011) चैनल: इमेजिन टीवी
द्य नीम नीम शहद शहद (2011) चैनल: सहारा वन
द्य तुझ संग प्रीत लगाई सजना (2012) चैनल: सहारा वन
द्य सफर फिल्मी कॉमेडी का . (2013) चैनल: सोनी सब
द्य नादानियाँ (2013) चैनल: बिग मैजिक
द्य सिंहासन बत्तीसी (2014) चैनल: सोनी पल
द्य बेताल और सिंहासन बत्तीसी (2015) चैनल: सोनी सब
द्य यारो का टशन (2016) चैनल: सोनी सब
द्य इश्क सुभान अल्लाह (2018) चैनल: ज़ी टीवी
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इश्क आज कल







