छांगुर बाबा का पूरा गैंग जेल की सलाखों के पीछे जाना चाहिए, तभी ये धर्मांतरण का खेल रुक पाएगा. छांगुर बाबा गैंग का सरगना है, लेकिन उसके गैंग लोग अब भी खुलेआम घूम रहे हैं.
औरैया:
यूपी में अवैध धर्मांतरण के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें मुख्य आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को यूपी ATS ने गिरफ्तार किया है. आरोपी छांगुर बाबा को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. बाबा छांगुर के जाल में फंसी कई लड़कियों ने अब अपनी आपबीती सुनाई है, जो बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक है. बलरामपुर के छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन की कुंडली धीरे-धीरे खुल रही है. छांगुर के धर्मांतरण रैकेट में कैसे फंसाया जाता था पीड़ित लड़कियां अब खुलकर सामने आकर पूरी बात बता रही है. सोमवार को लखनऊ में दो युवतियों ने मीडिया को पूरा किस्सा बताया. जानिए क्या कहा-

पहली पीड़िता ने क्या बताया
पहली पीड़िता ने बताया कि मुझे मारपीट कर बेहोशी की हालत में उतरौला ले जाया गया. कहा गया कि मेरा रूहानी इलाज किया जाएगा. छांगुर का गुर्गा फरमान मुझे सहारनपुर ले गया. वहां मुझे नकली नाम से अस्पताल में भर्ती करवाया गया. ये लोग सीधी कॉल नहीं करते थे. इंटरनेट कॉल के जरिए संपर्क में रहते थे. वे मुझे सऊदी लेकर गए थे. मैं ब्यूटीशन हूं, मुझसे कहा गया कि वहां अच्छी कंपनी में नौकरी लगवा दूंगा. वहां शादी कर सेटल हो जाएंगे. वहां जाकर पता चला कि यह हिंदू नहीं, मुस्लिम हैं. देवबंद, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर मिनी पाकिस्तान में इनका रैकट है.
दूसरी युवती की आपबीती
दूसरी पीड़ित ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है. औरैया की रहने वाली युवती ने बताया कि वो रूद्र बनकर मेरी मम्मी को 2019 में पापा की शराब छुड़वाने के लिए मिला था. इसके बाद हम छांगुर बाबा से मिले. छांगुर ने एक ताबीज दिया और दुआ पढ़ी. रूद्र की बहन मेरे घर पर नाम बदलकर आती जाती थीं. 2024 में उसने कहा कि बाबा कानपुर आए हैं, उनसे मिल लो. हम उसके साथ चले गए. वह मुझे फतेहपुर मस्जिद में ले गया. मेरे साथ जबरन निकाह किया गया. तब मुझे पता चला कि उसका नाम मेराज अंसारी. वीडियो कॉल पर छांगुर बाबा भी था. उन्होंने मेरा नाम जैनब रखा. सबा नाम की औरत को मेरी नकली मां बनाया था. तीन महीने तक मुझे बंधक रखा गया. वह फोन पर 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की बात करता था. उसके बड़े पापा पाकिस्तान में रहते हैं. मुझे वहां भेजने की बात भी करते थे.

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER