TIO राशिद अहमद

भ्रष्टाचार के मामले में आबकारी विभाग के बड़े अधिकारी को पहली बार सजा
सरकारी सिस्टम भ्रष्ट तो है ये तो सभी जानते हैं और मानते भी हैं लेकिन हम आपको एक ऐसा अनोखा मामला बताने जा रहे हैं। जिसमें अधिकारी और बाबू ने फंला को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में ही हेरफेर कर दी। इस मामले में पीड़ित हैं सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के मालिक अजय अरोरा।
भोपाल कोर्ट ने 7 जुलाई 2025 को अपने तरह के इस अनोखे मामले में आबकारी विभाग के रिटायर्ड आबकारी उपायुक्त विनोद रघुवंशी को 4 साल की सजा सुनाई है। वहीं एक अन्य आरोपी आबकारी विभाग के रिटायर्ड क्लर्क ओपी शर्मा को 2 साल की सजा सुनाई है।
अपर सत्र न्यायाधीश दीपक बंसल ने आपराधिक अपील क्र. 489/2023 में विनोद रघुवंशी जो कि पूर्व उपायुक्त आबकारी विभाग की सजा को 4 साल बढ़ाते हुए उनकी अपील ख़ारिज कर दी l यह मध्य प्रदेश के इतिहास में सम्भवतः पहली बार हुआ की किसी आबकारी विभाग के उच्च अधिकारी को न्यायालय द्वारा इतनी कड़ी सजा आपराधिक कृत्य के लिए दी गयी है
यह मामला 2003-04 के भोपाल के आबकारी ठेकों में हुई धोखाधड़ी और धांधली से जुड़ा हुआ है। जिसमें पीड़ित सोम डिस्टलरीज के मालिक अजय अरोरा को उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के कई बार चक्कर काटने पड़े और 22 साल लंबी लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला।
भोपाल के आबकारी ठेकों में हुई धोखाधड़ी व धांधली से अनुचित लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्तियों भगवती प्रसाद कुल्हरा, बद्री प्रसाद जायसवाल, हरप्रसाद जायसवाल सहित बाकी आरोपियों को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी थी।
शासकीय सेवा में रहते हुए विनोद रघुवंशी ने अपने पद व अनुचित धन के प्रभाव से उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में बड़े-बड़े वकील, जो कि एक-एक पेशी का लाखों रुपए लेते हैं खड़े करके प्रकरण का निराकरण रोकते रहे, लेकिन आखिरकार अंततः 22 साल लंबी लड़ाई के बाद न्याय व सत्य की जीत हुई l
फरियादी सोम डिस्टलरीज के अजय अरोरा ने आरोपियों को खिलाफ प्राइवेट कंप्लेंट दायर की थी। इस मामले में भोपाल कोर्ट ने 29 अगस्त 2023 को विनोद रघुवंशी और ओपी शर्मा को तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी, सजा को कराने के लिए आरोपियों ने शासन और अजय अरोरा के खिलाफ कोर्ट में पिटीशन लगाई थी, जिसे कोर्ट ने न सिर्फ खारिज किया बल्कि सजा और बढ़ा दी
अब आपको बता दें कि आखिर आरोपियों ने किया क्या था
दरअसल 5 मार्च 2002 को अजय अरोरा ने अशोक ट्रेडर्स फर्म में हिस्सेदारी ली थी और पार्टनरशिप डीड तैयार हुई थी। वह 18 प्रतिशत के हिस्सेदार थे। 6 मार्च 2022 को फर्म ने आबकारी के ठेके की नीलामी में हिस्सा लिया। आबकारी ने ठेके की नीलामी स्वीकार कर फर्म को ठेका आवंटित कर दिया।
इससे फर्म को शराब के व्यवसाय का लाइसेंस मिल गया। लेकिन, आरोपी विनोद रघुवंशी और ओपी शर्मा ने धोखाधड़ी कर 6 मार्च 2003 की नकली पार्टनरशिप डीड तैयार कर दी और अजय अरोरा को फर्म की हिस्सेदारी से बाहर कर दिया।
आरोपियों ने फर्म के अन्य पार्टनर को फायदा पहुंचाने के लिए 6 मार्च से 11 मार्च 2003 के बीच भोपाल आबकारी कार्यालय के रिकॉर्ड में अजय अरोरा का नाम हटाकर नकली पार्टनरशिप डीड लगा दी थी।
Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER