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नई दिल्ली में इसी साल मार्च महीने में दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जज यशवंत वर्मा के घर से जले हुए नोट मिलने की तस्वीरें सामने आई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के लिए एक तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया, जिसने 10 दिन की जांच के बाद रिपोर्ट तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को सौंपी। अब इसी रिपोर्ट की एक कॉपी वायरल हो रही है। इसके अंत में लिखा गया है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोप इतने गंभीर हैं कि जज को हटाने के लिए कार्यवाही शुरू की जा सकती है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जस्टिस वर्मा कौन हैं और उनके खिलाफ केस क्या है? इस मामले में जांच पैनल ने किस तरह जांच की? किन-किन सवालों के जवाब तलाशे गए और इनके जवाब में जांच करने वाले जजों को क्या मिला? आइये जानते हैं…

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?
56 साल के जस्टिस यशवंत वर्मा को अक्तूबर 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, जस्टिस यशवंत वर्मा ने 8 अगस्त 1992 को वकील के रूप में नामांकन कराया था। 13 अक्तूबर 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 1 फरवरी 2016 को जस्टिस वर्मा स्थायी न्यायाधीश बने। 11 अक्तूबर 2021 को जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे।
Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER