​​​​​​​TIO नई दिल्ली

18 सितंबर को महिला सैन्य कर्मियों ने SC में आरोप लगाए थे। फाइल तस्वीर - Dainik Bhaskar
18 सितंबर को महिला सैन्य कर्मियों ने SC में आरोप लगाए थे। फाइल तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भारतीय सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की 13 महिला अफसरों के आरोपों पर सुनवाई होगी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखेंगी।

18 सितंबर को महिला अफसरों ने जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने पक्ष रखा था। कहा था कि उन्हें स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने में पुरुष अफसरों की तुलना में भेदभाव किया गया है।

अफसरों ने कहा था कि गलवान, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में बराबर योगदान के बावजूद परमानेंट कमीशन देने में मनमानी की गई।

महिला अफसरों ने दलील दी थी कि हमारी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) को पुरुष अफसरों की तरह नहीं आंका गया। पुरुष अफसरों की ‘क्राइटेरिया अपॉइंटमेंट्स’ को आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज किया गया, जबकि हमारी पोस्टिंग के बावजूद ACR में इसका जिक्र नहीं किया गया।

इस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा था…

QuoteImage

एक ही ट्रेनिंग और पोस्टिंग होने के बावजूद पुरुष और महिला अफसरों के लिए दो अलग-अलग पैमाने कैसे हो सकते हैं। क्राइटेरिया अपॉइंटमेंट्स पुरुष अफसरों की ACR में तो दर्ज किए जाते हैं, लेकिन महिला अफसरों के मामले में इसे अनदेखा किया गया।

QuoteImage

महिला अफसरों बताया अपना योगदान

  • लेफ्टिनेंट कर्नल वनीता पाधी को कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन और फिरोजपुर (पंजाब) बॉर्डर एरिया में कंपनी कमांडर की जिम्मेदारी मिली।
  • लेफ्टिनेंट कर्नल चांदनी मिश्रा 88 देशों में पहली महिला पायलट रहीं, जिन्होंने MEAT (Manoeuvrable Expendable Aerial Target) उड़ाया।
  • लेफ्टिनेंट कर्नल गीता शर्मा को लद्दाख में गलवान ऑपरेशन के दौरान कम्युनिकेशन यूनिट की कमान दी गई।
  • लेफ्टिनेंट कर्नल स्वाति रावत को ऑपरेशन सिंदूर और जम्मू-कश्मीर के बासौली में काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स में कमांडिंग पोस्टिंग दी गई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी हुई

18 सितंबर को सीनियर एडवोकेट वी. मोहना ने बेंच को दलील दी थी कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के 2020 और 2021 के आदेशों को बार-बार अनदेखा किया है। सरकार ने वैकेंसी की कमी का बहाना बनाया, जबकि कई मौकों पर 250 अफसरों की सीमा भी पार हो चुकी है।

मामले की बुनियाद

17 फरवरी 2020 के बबीता पुनिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को स्थायी कमीशन देने से इनकार करना असंवैधानिक बताया था। इसके बाद 2021 के निशिता केस में भी अदालत ने समान अवसर देने का आदेश दिया था।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, THE INFORMATIVE OBSERVER